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दीपावली पर सामूहिक रूप से करते हैं सैला नृत्य

 19 Jul 2021 01:18 AM

जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा प्रतिमा शाह और साथियों द्वारा ‘बघेली गायन आयोजित किया गया। इसमें सर्वप्रथम कजरी गीत- हरे रामा छाई घटा घनघोर..., सुहाग गीत- लाली-लाली चूड़ियां..., सोहर गीत- अंगना में ठाड़ी ननदिया..., सुनाया गया। दूसरी प्रस्तुति चैन सिंह श्याम और साथियों द्वारा गोंड जनजातीय गायन एवं नृत्य की हुई। प्रस्तुति में सर्वप्रथम शिव वंदना, उसके बाद गोंड समुदाय के पारंपरिक जनजातीय गीत करमा व सैला गीतों की प्रस्तुति दी गई। सवा हाथ का डंडा हाथ में लेकर नृत्य - गीत करने के कारण इसका नाम सैला पड़ा है। गोंड जनजाति का दशहरा त्योहार के बाद शरद चांदनी की रात में सैला रीना नृत्य गीत के साथ संपन्न होता है। ये लोग दीपावली के दिन गांव में सामूहिक रूप से एकत्र हो कर सैला रीना नृत्य गीत करते हैं।