उदासी से उबारने कोई दोस्तों को सुना रहा फोन पर जोक, तो कोई देख रहा कॉमेडी शो

 02 May 2021 01:54 AM

मशहूर एक्टर चार्ली चैपलिन ने कहा था कि बिना हंसी का दिन एक बेकार दिन होता है, लेकिन अभी हालात ऐसे हैं कि चेहरों से मुस्कान की पतली लकीर भी नदारत है। चिंता और भय के बीच डोलते जीवन में हंसी के पल मुश्किल से मिल पा रहे हैं फिर भी अपनों के लिए चेहरे पर मुस्कान बनाए रखने की कोशिश हर कोई कर रहा है । क्योंकि बिना हंसे मुस्कुराए कठिन समय और उसकी चुनौतियों से पार लगना और भी दुश्वार हो जाता है। पिछली बार किस बात को याद करते हुए कोई खूब हंसा था, ऐसे जीवन के पल कुछ लोगों ने साझा किए। यह मैं हूं और यह मेरी हंसी। कुछ इस अंदाज में लोगों ने अपने किस्सा बयां किए।

हंसने से शरीर का प्रतिरोधी तंत्र मजबूत होता है

हास्य योग कोरोनकाल में जरूर करें जब भी योगा करने बैठे। इससे काफी तनाव निकल जाता है। शुरूआत में अकेले हंसना असहज लगता है, लेकिन बाद में हंसी को रोकना कठिन हो जाता है। अगर आप तनाव में हैं और आप अपने शरीर का ख्याल नहीं रख पा रहे हैं तो आप तब तक फिट नहीं महसूस करेंगे जब तक आप संतुलित नहीं होंगे। हंसने से शरीर का प्रतिरोधी तंत्र मजबूत होता है और ब्लड प्रेशर भी ठीक होता है। रोजाना सुबह, दोपहर, शाम और रात को सोने से पहले एक बार खिलखिलाकर जोर से जरूर हंसे । यह मत सोचे की कोई क्या सोचेगा। हंसी से माहौल सकारात्मक होता है जितना हो सके फैलाएं। -ममता गुरू, योगाचार्य

कैसे दें खुद को हंसने का मौका

पद्मासन, सुखासन, घूमते-फिरते और घर या आॅफिस में बैठे हुए भी इसका अभ्यास आसानी से किया जा सकता हैं। शुरूआत में मंद-मंद मुस्कुराए, फिर धीरे-धीरे खूब ठहाके लगा- लगाकर हाथों को ऊपर उठाकर हंसते रहें। शुरू-शुरू में 2 से 3 मिनट तक करें, फिर धीरे-धीरे अपनी सुविधानुसार आप इसे कर सकते हैं। इसका अभ्यास 8 साल के बच्चे से लेकर 80 साल के बुजुर्ग तक कर सकते है।

1998 में भारत से हुई शुरुआत

विश्व हास्य दिवस प्रत्येक वर्ष मई माह के पहले रविवार को मनाया जाता है। वर्ष 1998 में विश्व हास्य दिवस का शुभारंभ किया गया। इस दिवस को शुरू करने का श्रेय हास्य योग आंदोलन के संस्थापक डॉ . मदन कटारिया को जाता है। उन्होंने ही विश्व हास्य दिवस को पहली बार मुंबई में 11 जनवरी 1998 को मनाया था। जिसका उद्देश्य समाज के तनाव को कम कर उन्हें हास्य रुपी सुखी जीवन देना है।

मुझे बिंदु टिफिन वाली कहते हैं, तो हंस देती हूं...

मैं कोविड के कारण होम आइसोलेशन में रह रहे परिवारों तक भोजन पहुंचाती हूं। मेरा नंबर कई लोगों के पास है, तो ऐसे कई किस्से होते हैं कि हम बहुत देर तक ठहाके मारकर हंसते रहते हैं। मेरे पति ब्रिगेडियर रमाकांत घाटपांडे के पास कॉल आता है कि घाटपांडे डिब्बेवाले बोल रहे हैं तो वो चौंक जाते हैं कि बिग्रेडियर को डिब्बावाला कहा जा रहा है, और फिर जब वो यह बात मुझे बताते हैं तो हम दोनों देर तक हंसते रहते हैं। लोगों को लगता है कि मैं कोई टिफिन सेंटर चलाती हूं तो मेरे से कहते हैं, बिंदु टिफिन वाली बोल रही हैं। यह सुनकर बेतहाशा हम हसंते हैं। किसी को अब क्या कहें कि हम कौन है ,लेकिन सेवा कर रहे हैं तो बुरा नहीं मानते। कई बार मुस्कान के साथ आंसू भी आ जाते हैं जब अच्छे समक्ष घरों के लोग कहते हैं कि आपने खाना दिया है, आपके पैर छूना है। - बिंदु रामकांत घाटपांडे, सोशल एक्टिविस्ट