ढोकरा कला में दिखी मारिया समुदाय के ढोलवादक की प्रतिमा

 27 Apr 2021 01:33 AM

माड़िया, छत्तीसगढ़ के दंडामी मारिया समुदाय की प्रतिमा है। गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय द्वारा सप्ताह के प्रदर्शन इस बार पारंपरिक नृत्य परिधान में एक प्लेटफार्म पर खड़े हुए इसे दर्शार्या गया है। ढोकरा कला का यह अद्भुत प्रादर्श छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के घढ़वा समुदाय में प्रचलित लॉस्ट वैक्स कास्टिंग की एक प्राचीन तकनीक से निर्मित है। मूलत: यह ढोल वादक एक रिबन से बंधा हुआ भैंस के सींगों का एक जोड़ा और बीच में खोंसे गए दुर्लभ पौधे का एक गुच्छा धारण करते हैं। इस तरह के शिरो- आभूषण के कारण इस जनजाति को बाइसन हॉर्न माड़िया के लोकप्रिय नाम से भी जाना जाता है जिसे वे आम तौर पर त्योहारों, विवाह और अन्य समारोहों के दौरान धारण करते हैं। इस सम्बन्ध में संग्रहालय के निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने बताया कि ‘सप्ताह के प्रादर्श’ के अंतर्गत संग्रहालय द्वारा पूरे भारत भर से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है। इन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है।

चेहरे को छुपाती लटकने

वादक के चेहरे को छिपाती कौड़ी की कई लटकने शिरो-आभूषण से लटकाई गई हैं। एक लम्बा ढोल उसके कंधे पर लटकाया गया है। इस कलाकृति इस अर्थ में अद्वितीय है कि इसके हिस्सों को आसानी से अलग कर इसे परिवहन और पुन: जोड़े जाने के अनुकूल बनाया गया है। आकृति को आभूषणों और अलंकरण के अन्य रूपांकनों द्वारा भी सजाया गया है। पुरुष ढोल वादक के दोनो तरफ संगत देते दो छोटे ढोल वादक भी हैं।