अवॉर्ड विनिंग शॉर्ट मूवीज में वर्क फ्रॉम होम से लेकर गेमिंग एडिक्शन पर बात

 18 Nov 2020 12:47 AM

फिल्मों के जरिए मनोरंजन और वेब सीरीज के जरिए बड़े-बड़े अपराधों, स्कैम, ड्रग्स, किडनैपिंग और वायरस आदि विषयों पर कंटेंट देखा जा रहा है। लेकिन कुछ और भी ऐसा है, जो इन सबसे हटकर थॉट प्रोवोकिंग है। यूट्यूब पर अवॉर्ड विनिंग शॉर्ट मूवी आ रही हैं, जिनमें ऐसे मुद्दों को चुना गया है, जिन पर हमारा ध्यान तो होता है, लेकिन कभी विचार नहीं कर पाते। हालांकि, इन्हें देखने के बाद बदलाव की कोशिश जरूर कर सकते हैं। ‘चप्पल’ की कहानी से लेकर एक हेलमेट की रोचक कहानी को निर्देशकों ने मनोरंजक ढंग से ढाला है, जिससे बेहतरी के लिए दिमाग में आयडिया जरूर आता है। अनलॉक में वर्क फ्रॉम होम से लेकर लोगों में लगी मोबाइल की लत को लेकर भी मूवीज बनी हैं। यूट्यूब पर फ्री हैं यह मूवीज यूट्यूब पर यह अवॉर्ड विनिंग मूवीज फ्री में देख सकते हैं। इंस्टेंट मनोरंजन के लिए कुछ अच्छा कंटेंट देखने का मन हो तो यह बेस्ट आॅप्शन हैं। 10 से 30 मिनट की इन मूवीज के जरिए फिल्म शूट करने के तरीके भी समझ सकते हैं, क्योंकि यह एक्सपेरिमेंटल मूवीज हैं, जिन्हें सामान्य कैमरा या मोबाइल फोन से शूट किया गया है। कुछ मूवीज में तो बिल्कुल भी संवाद नहीं है, तो कुछ सोलो एक्ट में तैयार की गई हैं।

द ब्लू हेलमेट

एक बुजुर्ग महिला की कहानी है। मूवी में कोई डायलॉग्स नहीं हैं। बस एक्सप्रेशन व सीन के जरिए कहानी बहुत इमोशनल बन पड़ती है। महिला हर समय अपने सिर पर ब्लू हेलमेट लगाए रहती है। घर के भीतर-बाहर भी यह हेलमेट लगाए रहती है। कई बार वो हंसी का पात्र तो कहीं हैरत भरी निगाहों से देखी जाती है। यहां तक की योगा करते समय भी वो हेलमेट लगाए रहती है। बेटे को सड़क हादसे में खोने के दर्द को आखिरी सीन में दिखाया गया है। यह फिल्म पेरेंट्स के लिए है , जो अपने बच्चों को महंगी बाइक तो दिला देते हैं लेकिन हेलमेट लगाने की अनिवार्यता पर गौर नहीं करते।

चप्पल

आपने एक चप्पल की लाइफ पर कभी गौर किया है। कैसा होता है उसका सफर! एक चप्पल का सफर दुकान से शुरू होता है। एक शख्स उसे खरीदकर घर लाता है और एक बुजुर्ग शख्स पहनता है। फिर मंदिर के बाहर से वह चोरी होती है और फिर कई पड़ावों से गुजरती हुई डस्टबिन में फेक दी जाती है, लेकिन किसी के लिए यह पुरानी चप्पल जरूरत भी हो सकती हैं।

लेवल-13

कंपनी में मैनेजर अपनी पत्नी को बॉस की पार्टी में लेकर जाता है और उसे मोबाइल गेमिंग से दूर रहने को कहता है, लेकिन पत्नी को पार्टी पसंद नहीं तो वो हेडफोन लगाकर मोबाइल गेम खेलने में व्यस्त हो जाती है। मैनेजर का अपने बॉस की बीबी से अफेयर रह चुका है तो वो उसे फिर इंप्रेस करने की कोशिश करता है। इस बीच गेम एडिक्ट वाइफ का गेम बिगड़ जाता है और वो चिल्लाने लगती है। लोग उसे हैरत से देखते हैं, तभी बॉस का बेटा भी खुशी से चिल्लाने लगता है कि उसने लेवल-13 क्रॉस कर लिया। तब महसूस होता है गेमिंग एडिक्शन एक या दो लोगों को नहीं कई लोगों को है।

मसाला स्टेप्स

इंवेस्टमेंट एजेंट को घाटा होने के कारण उसके पास काम नहीं बचता तो जिंदगी खत्म करने जैसे ख्याल आने लगते हैं। इस बीच उसे रस्सी पर करतब दिखाने वाली लड़की और उसके साथी की एकंरिंग से जिंदगी के अहम सबक मिलते हैं। फिल्म में डायलॉग है ‘जब ऊपरवाला ऊंचाई पर लेकर जाता है तो बीच-बीच में रोक भी देता है, यह देखने के लिए कि मुड़कर देख लो! यार-दोस्त बचे भी हैं या नहीं!’

वर्क फ्रॉम होम

वर्क फ्रॉम होम भले ही न्यू नॉर्मल कहा जाने लगा हो लेकिन इसके साथ तालमेल बिठा पाना कई लोगों के लिए आसान नहीं। कई लोग जो एक-दूसरे के साथ कुछ मिनट भी साथ नहीं रह पाते उन्हें घंटों एक साथ रहना होता है। उनके बिगड़े हुए रिश्ते वर्क फ्रॉम होम में और भी नई मुश्किलों का सामना करते हैं। इस दौरान लड़ाई-झगड़े और दबे-छुपे रिश्तों की असलियत भी उजागर होने लगती है।