इसी सत्र में तकनीकी शिक्षा मातृभाषा में प्रारंभ होगी : डॉ. अनिल सहस्त्रबुद्धे

 10 Jun 2021 01:42 AM

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के स्वप्न को साकार करते हुए मातृभाषा में शिक्षा को तकनीकी शिक्षा में सबसे पहले लागू किया जा रहा है। शिक्षा का मतलब समाजोन्मुख शिक्षा होना चाहिए। अंतर्निहित क्षमता को पहचानना और उसे विकसित करना ही शिक्षा का काम होता है। यह उद्गार शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डॉ. अनिल सहस्त्रबुद्धे ने व्यक्त किए। ‘वर्तमान परिस्थितियों में शिक्षण संस्थाओं की भूमिका’ विषयक संगोष्ठी में प्रस्तावना रखते हुए संगोष्ठी में डॉ. सहस्त्रबुद्धे ने बताया कि दिव्यांगों के लिए राज्य स्तर पर केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं। मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा के विषय लेखकों को दो लाख रुपए और अंग्रेजी से अनुवाद करने वालों को डेढ़ लाख रुपए दिए जा रहे हैं।

इन्होंने भी लिया भाग

संगोष्ठी में शारदा समूह झाबुआ के ओमप्रकाश शर्मा, स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय सागर के कुलाधिपति डॉ. अजय तिवारी, अमृता यूनिवर्सिटी केरला के डॉ. आर भवानी राव, संस्कृत विश्वविद्यालय मथुरा के कुलपति डॉ. राणा सिंह, त्रिपुरा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गंगाप्रसाद, एनआईटी त्रिपुरा के डायरेक्टर डॉ. एचके शर्मा सहित देश के बीस महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थाओं के संचालकों ने कोरोना काल में उनकी संस्थाओं द्वारा किए गए सेवाकार्यों का प्रस्तुतीकरण दिया।