अजन्मी कन्याओं की हत्या देखकर लेखक ने द्रवित होकर लिखी किताब

 02 May 2021 01:59 AM

यह कैसी विदाई... पुस्तक पर चर्चा का आयोजन इंद्रा पब्लिशिंग हाउस द्वारा किया गया जिसमें मुख्य अतिथि लेखक डॉ. डीयू पाठक (जनरल सर्जन) से उनकी किताब पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा यह सिर्फ किताब नहीं हैं, किताब के माध्यम से एक संदेश है जिससे अधिक से अधिक से लोगों तक पहुंचाकर भ्रूण हत्या रोकने में मदद कर सकें। चीफ एडिटर दीपाली गुप्ता ने लेखक के साथ इस कार्यक्रम में चर्चा की। लेखक ने बताया कि अजन्मी कन्याओं की हत्या देखकर वे इतने द्रवित हुए कि उनसे रहा न गया और उनकी कलम से यह खंड काव्य अनायास ही फूट पड़ा। लेखक ने यह किताब देश की बेटियों के नाम की है।

गर्भ में पल रही बच्चियां करती हैं सवाल

इस पुस्तक में बेटी अपने पिता से जो प्रश्न पूछती है, वे मार्मिक हैं। किताब में लिखा है पापा! हमें तो यह मालूम था कि किलकारियों से हमारा स्वागत नहीं होगा, लेकिन इसका तनिक भी अंदाजा न था कि बीच रास्ते में ही हमारा गला घोंट दिया जाएगा। अभी तो हमने आपकी गली में प्रवेश ही किया था, घर आंगन तो अभी दूर था, तब भी हमें दूर से ही देखकर आपने हमें भेड़ियों के आगे डाल दिया? अभी तो हम आपके देश में आए ही नहीं थे और देश निकाला दे दिया? किस जुर्म की सजा है यह? इस तरह की कई मार्मिक बातें आपको इस किताब में मिलेंगी।