सिपाहियों की वर्दियां आन- बान-शान स्वाभिमान की धनी‘

 17 Oct 2020 01:09 AM  304

आज से ये तिरंगा कभी झुकेगा नहीं, ये तिरंगा तो हमारी आन बान है। ये हमारी आजादी की पहचान है। माना आज उदासी है, धरा खुशी की प्यासी है रीता-रीता हर घट है। सूना हर पनघट है। फिर से बादल बरसेगा फिर से धरती झूमेगी...’ कविता से शौर्य स्मारक मंच को गुंजायमान करने वाले लखीमपुर के कवि आशीष अनल अवस्थी का श्रोताओं ने तालियां बजाकर भरपूर स्वागत किया। मौका था शौर्य स्मारक के चौथे स्थापना समारोह की आखिरी शाम में शुक्रवार को आयोजित कवि सम्मेलन का, जिसमें प्रदेश सहित देश के कवियों ने भाग लिया। कानपुर के कवि डॉ. सुरेश अवस्थी ने सीमा पर न होते वो शहीद तो कैसे मनाते दिवाली ईद... कविता सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। सुदीप भोला ने पुलिस वालों के लिए वर्दी कविता सुनाते हुए कहा कि ये वर्दियां सैनिकों की वर्दियां ये सिपाहियों की वर्दियां जो वतन के वास्ते खून में सनी रहीं, आन बान शान स्वाभिमान की धनी रहीं...।