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युवाओं ने पहचानी अपनी शक्ति और जीवन संवारने समाधान की तलाश में निकल पड़े

 12 Jan 2021 01:29 AM

स्वामी विवेकानंद के विचार अंनतकाल तक युवाओं को प्रेरणा देते रहेंगे। उनके विचारों के ओज से ही युवा अपने भीतर ऊर्जा व आत्मविश्वास का अनुभव कर सकते हैं। उनका कहा कई मौके पर चरितार्थ होता है। उनका संदेश है कि लक्ष्य एक बार निर्धारित होते ही युवाओं के जीवन का गठन शुरू हो जाता है, जबकि लक्ष्य के अभाव में 99 फीसदी शक्तियां इधर-उधर बिखरकर कर व्यर्थ चली जाती हैं। हमने ऐसे ही युवाओं की चंद कहानियों को पेश किया है, जो कि सभी के सामने एक मिसाल हैं। इन्होंने अपने भीतर ही समस्या और उसके समाधानों की खोज की तो किसी ने जीव सेवा को ईश्वर की सेवा माना। स्वामी विवेकानंद की 158 वीं जयंती पर राष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर उनके सूत्र वाक्यों से जुड़ी यह कहानियां निश्चित ही प्रेरणा स्त्रोत बनेंगी।

हड्डियां टूटती हैं,लेकिन हौसला नहीं

19 ऑपरेशन के बाद अब इस स्थिति में पहुंची हूं कि थोड़ी- थोड़ी देर का ब्रेक लेकर दीवारों पर पेंटिंग कर लेती हूं। शहर की दीवारों पर चल रही पेंटिंग के काम से जुड़ी पूजा प्रजापति की हड्डियां इतनी कमजोर हैं कि कभी भी टूट जाती हैं। पूजा कहती हैं, मुझे आॅस्टियोजेनेसिस इंपरफेक्टा नाम की बीमारी है। बिस्तर पर लेटे हुए मेरा जीवन बीतने लगा, लेकिन चित्रकारी करने का मन करता था। जो कागज आसपास मिलता उस पर चित्र बनाने लगती। मेरा यह शौक बढ़ता गया लेकिन गुना में रहने के कारण कोई ऐसा माध्यम नहीं मिला, जो मुझे अच्छे से पेंटिंग सीखा सके। मैंने हार नहीं मानी और खुद ही पोट्रेटे से लेकर स्केचिंग तक करने लगी। अभी मेरा एक आॅपरेशन और बाकी है , जिसमें दो लाख रुपए का खर्चा आएगा , क्योंकि मेरा शरीर का एक हिस्सा एक तरफ झुकता जा रहा है । फिलहाल रोजगार की तलाश में भोपाल आई थी, क्योंकि कोरोना की वजह से अब कोई अपने बच्चों को पेंटिंग सीखने नहीं भेज रहा। मैंने भोपाल में कुछ पेंटिंग एग्जीबिशन में अपने चित्र पेश किए तो कुछ पेंटिंग सेल भी हुर्इं। एक दिन आर्टिस्ट वसीम खान को सड़क किनारे पेंटिंग करते देख रही थी, तो उनसे कहा मुझे भी पेंटिंग आती है कुछ काम हो सके तो उपलब्ध कराएं। उन्होंने मदद की और सड़क के किनारे की दीवारों पर पेंटिंग करने लगी। भोपाल में केशव शर्मा पेंटिंग सीखने में मदद करते हैं। मेरे पिता सब कुछ बेच चुके हैं और मजदूरी करते हैं।