थिएटर थमा, संघर्ष जारी ट्यूशन और मास्क बेचकर घर चला रहे आर्टिस्ट

 30 Apr 2021 01:36 AM

कोविड-19 महामारी और कोरोना कμर्यू के कारण थिएटर हॉल के साथ नाटक के शो बंद होने से इससे जुड़े एक्टर्स और अन्य लोग मुश्किल समय का सामना कर रहे हैं। साल 2020 के मार्च महीने में जब से लॉकडाउन हुआ था तब से कुछ थिएटर आर्टिस्ट तो घर पर ही है कुछ ने शहर को ही अलविदा कह दिया। रंगमंच में अपनी तकदीर की लकीर बदलने आए शहर के युवा रंगकर्मी इस समय मुश्किल हालातों से गुजर रहे हैं। थिएटर आर्टिस्ट्स जो दूसरे स्टेट्स से भोपाल आकर रंगमंच में अपनी किस्मत आजमाने आए थे आज वही आर्टिस्ट मास्क और कपड़े बेचने पर विवश है। कुछ आर्टिस्ट आॅनलाइन ट्यूशन कर अपना घर चलाने पर मजबूर हुए तो कई युवा थिएटर आर्टिस्ट्स को अपना सामान पैक कर अपने घर लौट गए। वहीं कुछ आर्टिस्ट शादी के सीजन को देखते हुए रिलेटिव के साथ कपड़े बेचने का काम कर रहे हैं। इन यंग थिएटर आर्टिस्ट्स का एक ही सवाल है भूख मिटाने के लिए पैसो की जरुरत तो पड़ती है और उसके लिए कोई ऐसा काम करना पड़े तो शर्म कैसी। इस हुनर का कहीं तो इस्तेमाल किया जा सकता है। आईएम भोपाल ने शहर के कईं थिएटर ग्रुप्स में अपनी अदाकारी से सिक्का जमाने वाले आर्टिस्ट्स से जाना वे इस समय आजीविजा के लिए कौन सा जरिया अपना रहे हैं।

दो हजार मास्क तैयार किए, कुछ बेचे

मैं रंगमंच से सालों से जुड़ा हुआ हूं। मैंने अपने जीवन में कभी भी स्टेज रुकते नहीं देखा है। ऐसा पहली बार है जब कभी रंगकर्मियों को आर्थिक परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। मेरा हमेशा से कॉस्ट्यूम डिजाइन करते हुए ही समय गुजरा है, लेकिन यह समय ऐसा आया है सभी आर्थिक और मानसिक हालातों से गुजर रहे हैं। जब से कोरोना काल शुरू हुआ है मैंने अभी तक दो से तीन हजार मास्क तैयार किए हैं। इनमें से मैंने कुछ तो बांट दिए कुछ बेचे भी। साल 2020 में जब लॉकडाउन लगा था तब से कुछ अंतराल में दो तीन हजार मास्क तैयार किए। इसके अलावा मैं जब भी जरूरी काम से बाहर निकलता हूं अपने साथ कुछ मास्क लेकर निकलता हूं और, जो लोग बिना मास्क के दिखाई देते हैं उन्हें मुμत में दे देता हूं और जागरूक भी करता हूं कि मास्क इस समय कितना जरूरी है। कोरोना काल में वैसे भी नाटक बंद हैं इसलिए किसी भी तरह के कॉस्ट्यूम नहीं सिल रहा हूं। जैसे ही परिस्थितियां सुधरेंगी सब सही हो जाएगा। अभी भी रोजोना 20 से 30 मास्क तैयार कर रहा हूं और जब ज्यादा संख्या में तैयार हो जाएंगे बेच दूंगा। -राकेश नामदेव,कॉस्ट्यूम डिजाइनर

रिलेटिव के साथ मिलकर ड्रेस बेच रहे

परिस्थितियां ठीक हुई थीं तब हमने नाटक खेलना शुरू किया था। इसमें 'मध्यांतर' और 'मस्त मौला' नाटक का मंचन भी किया था। कμर्यू लगने के बाद से जीवन यापान के लिए पैसे की तंगी को देखते हुए मैंने उधार में शादियों में इस्तेमाल होने वाला सामान, जैसे लहंगा और साड़ी के साथ मेकअप का सामान लिया और बेच रही हूं। मेरे साथ मेरी रिलेटिव भी हैं। वो मेकअप आर्टिस्ट हैं । हम दोनों साथ मिलकर काम कर रहे हैं। मैंने अपनी लाइफ में कभी भी यह काम नहीं किया है,लेकिन मजबूरी में काम करना पड़ रहा है। उम्मीद है जल्द ही सब ठीक हो जाएगा ।-विभा श्रीवास्तव, थिएटर आर्टिस्ट

ऑनलाइन क्लास से चल रहा घर

जब पिछले साल भी लॉकडाउन लगा था तब भी जीवन यापन के लिए मुझे राखियां बेचनी पड़ी थी। उसके लिए मैंने भोपाल शहर छोड़ा था। इस साल भी वहीं स्थिति है , लेकिन इस साल कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए घर से बाहर भी नहीं जा सकते। फिर मैंने ऑनलाइन ट्यूशन शुरू किया, जिसमें मैंने खासतौर से मैथ्स की क्लास लेना शुरू किया। उससे जितना कमाया उससे ही अब अपना खर्चा चला रहा हूं। अब स्कूल बंद होने से कुछ के पैरेंट्स ने भी ऑनलाइन क्लास बंद करने के लिए कह दिया है। आने वाला समय कैसा होगा कह नहीं सकता। - दीपांशु कुमार, थिएटर आर्टिस्ट