कथक में ऋतुओं को पिरोया

 27 Nov 2020 01:44 AM

संस्कृति विभाग द्वारा मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में आयोजित बहुविध कलानुशासनों की गतिविधियों पर एकाग्र ‘गमक’ श्रृंखला अंतर्गत गुरुवार को रागिनी मख्खर की ‘नृत्य-नाटिका’ की प्रस्तुति हुई। कथक नृत्यांगना रागिनी मख्खर और उनकी शिष्याओं द्वारा कथक की इस प्रस्तुति में छह ऋतुएं बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत एवं शिशिर सभी अपनी विशेषताओं के साथ प्रदर्शित हुई। इसके अलावा तराना, ठुमरी, बंदिश, होरी की प्रस्तुति रीति काल के प्रसिद्ध कवि पद्माकर के पदों पर आधारित यह प्रस्तुति तीन ताल, रूपक, झपताल, कहरवा तालों में निबद्ध रही। इसके अलावा कार्यक्रम में राकेश शर्मा ने ‘छायावाद के सौ वर्ष’ पर विषय पर व्याख्यान दिया।

निराला ने छंद तोड़ नवगीत का प्रवर्तन किया

राकेश शर्मा ने कहा- निराला ने छन्द तोड़ा भी और नवगीत का प्रवर्तन भी किया। निराला ने अपनी पत्रकारिता के माध्यम से अंग्रेज साम्राज्य के समक्ष प्रश्न खड़े किये। जयशंकर प्रसाद ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को भारतीय समाज के समक्ष रखा।