खिलौना मांग रही छोटी, मयस्सर नहीं रोटी '

 27 Apr 2021 01:37 AM

कोरोना से सब बेहाल, पिचके हैं खुशियों के गाल' जैसी रचनाएं पढ़कर प्रदेश के विभिन्न अंचलों के गीतकारों ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं । अवसर था मध्यप्रदेश लेखक संघ की प्रादेशिक गीत गोष्ठी का जिसका आयोजन जूम के माध्यम से आॅनलाइन किया गया । गोष्ठी के मुख्य अतिथि मुरैना के वरिष्ठ गीतकार भगवती प्रसाद कुलश्रेष्ठ और सारस्वत अतिथि प्रभुदयाल मिश्र थे । अध्यक्षता संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राम वल्लभ आचार्य ने की । गोष्ठी में पं. राम प्रकाश अनुरागी ग्वालियर, डॉ. सतीश चतुर्वेदी शकुंतला एवं नीलम कुलश्रेष्ठ गुना, वृन्दावन राय सरल सागर, प्रभु त्रिवेदी इंदौर, मुकेश अनुरागी शिवपुरी, देवेन्द्र तोमर मुरैना, जगदीश शर्मा सहज अशोक नगर, ममता बाजपेई, कमलकिशोर दुबे एवं कुमार चंदन ने विभिन्न अनुभूतियों के गीत पढ़कर वाहवाही बटोरी। राजेन्द्र गट्टानी के संयोजन में आयोजित गोष्ठी का संचालन डॉ. प्रीति प्रवीण खरे ने किया । गोष्ठी करने प्रदेश भर के गीतप्रेमी बड़ी संख्या में आयोजन से जुड़े रहे ।

इन्होने पढ़ीं कविताएं

गीत मेरे दुख सुख के साथी फिर भी मुझको प्यारे हो । -भगवती प्रसाद कुलश्रेष्ठ

मंत्र निष्फल निरर्थक हुए, शब्द के अर्थ मेरे लिये । -प्रभु दयाल मिश्र

बीत जायेंगे यों ही दि बीत जायेंगे, रोयेंगे कभी कभी गीत गायेंगे । -पं. राम प्रकाश अनुरागी

हर दुख गीत नहीं बन सकता, कितना ही स्वर लय में गा लो। -ममता बाजपेई

जीवनधारा कुछ कुछ बाधित कितना अब ठहरें, पल पल भय दोहित होता मन कैसे धैर्य धरें । -मुकेश अनुरागी

कैसे गाएं प्रीत के गान, दुख में जब हो हिन्दुस्तान । -वृन्दावन राय

सरल खिलौना मांग रही छोटी, मयस्सर हमें नहीं रोटी । -डॉ. सतीश चतुवेर्दी

शाकुन्तल चाहे जो इल्जाम लगाओ चाहे जैसी सजा सुनाओ, केवल मेरा दोष नहीं है तनिक तुम्हारी भी गलती है । -देवेंद्र तोमर

दुख अगर आदमी को सताता रहे, मन सुमन की तरह मुस्कुराता रहे । -जगदीश शर्मा सहज