हम मां-बेटी में सिर्फ प्रोफेशनल नहीं इमोशनल बॉन्डिंग भी: डॉ. लता मुंशी

 18 Oct 2020 01:02 AM  170

ऐसा कम ही होता है जिस प्रोफेशन में आप होते हैं सेम प्रोफेशन में आपका बच्चा भी हो। इस स्थिति में आप बच्चे से पहले दिन से ही मास्टरी की उम्मीद करते हैं। बहुत सख्त जज करते हैं और बच्चों को बहुत डांट खाना पड़ता है। ऐसा ही मेरी बेटी आरोही मुंशी के साथ भी होता है। हम अक्सर मानकर चलते हैं कि अगर मां अपने प्रोफेशन में अच्छी है तो बच्चा भी वैसा भी होगा। ऐसा होता नहीं है। समय के साथ ही बच्चा सीखता है और आगे बढ़ता है। मुझे आज भी याद है जब आरोही 10 साल की थी। उसकी पहली भरतनाट्यम की परफॉर्मेंस रीजनल साइंस सेंटर में हुई थी और जितना टेंशन उसे था उससे ज्यादा मुझे हो रहा था। ऐसा इसलिए भी हो रहा था, क्योंकि उसकी पहली परफॉर्मेंस थी। उस समय मेरी एक कॉस्ट्यूम थी, जो मैंने अपनी बचपन की परफॉर्मेंस के दौरान पहनी थी। मैंने वही कॉस्ट्यूम आरोही को पहनाकर स्टेज पर परफॉर्म कराया था। ऐसा सौभाग्य बहुत कम मिलता है जब बेटी मां की ही ड्रेस को अपनी पहली ही परफॉर्मेंस में पहनकर स्टेज पर नृत्य करे। उस वक्त परिस्थितियां ऐसी थी कि जूलरी भी नहीं थी और ड्रेस भी नई नहीं खरीद सकते थे। आज भी उन दिनों को याद करते हैं तो खुशी मिलती है। मुझे आज भी जब आरोही के साथ स्टेज शेयर करने का मौका मिलता है तब गर्व महसूस होता है।

डांस के साथ सीखा खाना बनाना

कोरोना ने जीवन में बहुत बदलाव किए हैंऔर एक ही घर में बॉन्डिंग स्ट्रॉन्ग भी हुई है। मेरी बेटी आरोही और मुझे इस कोरोना काल में एक साथ टाइम बिताने को जो समय मिला है शायद ही दोबारा ऐसा मिलेगा। ऐसा इसलिए भी हुआ है कि जब आप 24 घंटे साथ रहते हैं तब एक दूसरे को अच्छे से समझ पाते हैं। मेरी बेटी लॉकडाउन में डांस की प्रैक्टिस तो करती ही थी, डांस से जुड़ी टेक्निक्स पर डिस्कशन भी होता था। इस लॉकडाउन में एक बात अच्छी हुई की मेरी बेटी कभी खाना नहीं बनाती थी वो सीख गई। जब भी कुछ बनाना होता था मैं गाइड करती थी। मां-बेटी की यह बॉन्डिंग अब पहले ज्यादा स्ट्रांग हो गई है और यह समय मेरे साथ मेरी बेटी के लिए भी हमेशा यादगार हो गई है।

बेटी इमोशनली स्ट्रॉन्ग बनाती है

मेरी लाइफ में बेटी आरोही का योगदान सिर्फ डांस तक सीमित नहीं है। कुछ समय पहले मेरे एक पैर में फ्रैक्चर हुआ था और घर के सभी काम उस समय आरोही को ही करने पड़ते थे। उसे मेरे बारे में वो हर चीज पता है कि कैसे और किस तरह से चाहिए। कई बार तो ऐसा भी हुआ है कि बिन बोले भी बहुत सी ऐसी चीजें मुझे मिल जाती थीं, जो मैं सोच रही होती थी। इस तरह एक बेटी ने जब अपनी मां को समझ लिया हो तो थोड़ी इमोशनल हो जाती हूं। एक मां बेटी अगर सेम प्रोफेशन में हों तो जरूरी नहीं कि इमोशनल बॉन्डिंग भी नहीं होगी। प्रोफेशनली आप अपने आप को स्ट्रॉन्ग रख सकते हैं, लेकिन इमोशनली मेरी बेटी मुझे स्ट्रॉन्ग बनाती है।