पीपुल्स यूनिवर्सिटी में ‘मैकेनिज्म आॅफ प्ली बार्गेनिंग’ विषय पर वेबीनार

 21 Feb 2021 12:26 AM

पीपुल्स विश्वविद्यालय के विधि विभाग द्वारा ‘कोविड-19 के संदर्भ में आपराधिक न्याय प्रणाली में मैकेनिज्म आॅफ प्ली बार्गेनिंग’ विषय पर वेबीनार का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य वक्ता सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली के एडवोकेट जावेद राहत ,एडवोकेट ज्ञान शंकर ओझा और पीपुल्स विश्वविद्यालय के विधि विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर अमित कुमार श्रीवास्तव थे। कार्यक्रम की शुरुआत में एडवोकेट ज्ञान शंकर ओझा ने बताया इसकी शुरुआत रामायण काल में ही हो गई थी। एडवोकेट जावेद राहत ने प्ली बार्गेनिंग विषय को कैसे लागू किया जाए इस संबंध में बताया की वैवाहिक संबंधों में, छोटे अपराधों में इसको लागू किया जा सकता है। प्रोफेसर डॉक्टर अमित कुमार श्रीवास्तव ने बताया प्ली बार्गेनिंग का फायदा कोविड-19 के समय में उठाया जा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने मार्च- अप्रैल 2020 में कुछ कैदियों को जमानत पर रिहा किया था। 7 साल से कम के अपराधों में इस संकल्पना को लागू किया जा सकता है। महिलाओं, 14 साल से कम उम्र के बच्चों और ऐसे अपराध जो देश की सामाजिक एवं आर्थिक अपराध से संबंधित है उन पर प्ली बार्गेनिंग की संकल्पना को लागू नहीं किया जा सकता है। अगर इस संकल्पना का पालन सर्वोच्च न्यायालय करता है तो इससे सामाजिक दूरी भी संभव हो जाती है। पद संकल्पना काफी लाभदायक हो सकती है। कार्यक्रम के अंत में सवाल-जवाब सत्र के दौरान स्टूडेंट्स ने अपनी जिज्ञासाओं का समाधान और कॅरियर संबंधित चर्चा भी सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं से की।