मृत व्यक्ति के बचे रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते एक युवक को दबोचा

 01 May 2021 08:31 PM

 इंदौर। कोरोना मरीज की इलाज के दौरान मौत होने के बाद बचे हुए रेमडेसिविर इंजेक्शन को कालाबाजारी में बेचते एक युवक को पुलिस ने दबोच लिया है। इसमें एक महिला भी शामिल है, जिसे डॉक्टर बताया जा रहा है। विजयनगर पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य 25 से 30 हजार रुपए प्रति नग में इंजेक्शन बेचते थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से पांच रेमडेसिविर इंजेक्शन, चार पैकेट फेबिफ्लू टैबलेट और पांच अन्य प्रकार के इंजेक्शन जब्त किए हैं। पुलिस तीन दिन से आरोपियों की तलाश में लगी थी। शनिवार को खजराना क्षेत्र से अजहर नामक युवक को पकड़ा था। अजहर पहले एलआईजी चौराहा स्थित अस्पताल में काम करता था। उसने निर्मल, धीरज सहित तीन अन्य युवकों व महिला का नाम कबूला है।

फर्जी मरीज दर्शा कर लेते थे इंजेक्शन :
आरोपी अजहर एक गैंग का सदस्य है। यह गैंग मरीजों की फर्जी भर्ती दर्शा कर विधायकों व मेडिकल दुकानों से इंजेक्शन खरीद लेता था। आरोपी धीरज की बहन डॉ. नमृता एबी रोड स्थित एक निजी बड़े अस्पताल के कोविड वार्ड में पदस्थ हैं। पुलिस उसकी भूमिका भी जांच रही है। आरोपी कई जिलों में इस इंजेक्शन की कालाबाजारी कर महंगे दामों में बेच चुके हैं। इंदौर में अस्पताल अधिक हैं और मरीज भी बड़ी संख्या में मिल रहे हैं, इसलिए इंदौर में ज्यादा इंजेक्शन बेच चुके हैं। सूत्रों ने बताया कि डॉ. नम्रता अस्पताल में मरीज की मौत होने पर परिजन से यह कहकर इंजेक्शन लेती थी कि उनके परिवार में कुछ लोग बीमार हैं, बाद में इसे बाहरी लोगों को महंगे दाम में बेच देते थे।

विधायकों के नाम की जांच :
आरोपियों ने भाजपा से जुड़े दो विधायकों के नाम कबूले हैं। इन विधायकों की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच के बाद पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी, वहीं जिस मेडिकल स्टोर्स से इंजेक्शन खरीदे गए हैं, उसके संचालक की तलाश शुरू कर दी है। मेडिकल दुकान को सील कराने के लिए पुलिस ने ड्रग एवं औषधि विभाग को पत्र लिखा है।