कोरोना वैक्सीन के लिए भारत पर निर्भर हैं दुनिया के 92 गरीब देश

 04 Apr 2021 02:20 AM

लंदन। भारत ने देश में टीकाकरण अभियान को तेज करने के लिए कोरोना वायरस वैक्सीन के निर्यात पर अस्थायी रूप से रोक लगाई हुई है। इसी बात से दुनियाभर के कई देश भारत से खफा हैं। उनका आरोप है कि इससे करीब 92 गरीब देशों को समय से वैक्सीन की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। जबकि, सच्चाई यह है कि अमेरिका-ब्रिटेन समेत जितने भी धनी देश हैं, उन्होंने पहले से ही वैक्सीन की बड़ी मात्रा पर कब्जा जमाया हुआ है। ‘द गार्डियन’ में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, भारत पर वैक्सीन को लेकर आरोप लगाने वाला ब्रिटेन तो अपनी कुल आबादी के आधे वयस्क नागरिकों को वैक्सीन की कम से कम एक खुराक दे चुका है। वहीं, वह भारत से करीब 50 लाख और वैक्सीन की मांग कर रहा है, जिसने अपनी कुल आबादी का केवल 3 फीसदी ही वैक्सीनेशन किया हुआ है। सऊदी अरब, कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे धनी देशों को पहले ही करोड़ों की संख्या में वैक्सीन की आपूर्ति की जा चुकी है।

वैक्सीन उत्पादन की डील:

1 साल पहले आॅक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के जेनर इंस्टीट्यूट के रिसर्चर्स ने वैक्सीन विकसित करने की दौड़ में सबसे आगे रहते हुए कहा था कि वे किसी भी निर्माता के साथ कहीं भी अपने वैक्सीन के निर्माण का अधिकार देने का इरादा रखते हैं।

सीरम की वैक्सीन पर अमीर देशों का कोई अधिकार नहीं

दरअसल, भारत में सीरम इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया में बनाई जा रही आॅक्सफर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन पर अमीर देशों का कोई अधिकार ही नहीं है। यह वैक्सीन केवल भारत के लिए भी नहीं है। इसे दुनियाभर के करीब 92 गरीब देशों के लिए बनाया जाना है।

बिल गेट्स के फाउंडेशन ने बिगाड़ी व्यवस्था

इसके ठीक एक महीने बाद ही गेट्स फाउंडेशन की सलाह पर आॅक्सफर्ड ने अपने बयान से पलटते हुए यूके की एक मल्टीनेशनल फार्मा ग्रुप एस्ट्राजेनेका के साथ एक्सक्लूसिव राइट्स के समझौते पर हस्ताक्षर किया। जिसके बाद सीरम इंस्टीट्यूट को भी एस्ट्राजेनेका के साथ नई डील करनी पड़ी। जिसमें सीरम इंस्टीट्यूट को गावी (जीएवीआई) वैक्सीन अलायंस के अंतर्गत गरीब देशों के लिए वैक्सीन का निर्माण करना था।

92 गरीब देशों को वैक्सीन देगा भारत

इसमें 92 गरीब देश शामिल हैं, जिनमें करीब-करीब दुनिया की आधी आबादी रहती है। इसमें जनसंख्या के हिसाब से भारत का शेयर 35 फीसदी के आसपास होना चाहिए। हालांकि, एक अघोषित समझौते के तहत ऐसी व्यवस्था बनी थी कि सीरम इंस्टीट्यूट घरेलू आपूर्ति के लिए 50 फीसदी टीके का निर्माण करेगा, बाकी के 50 फीसदी वैक्सीन दुनियाभर में निर्यात की जाएगी।

भारत की अपील के खिलाफ इन्हीं देशों ने किया था विरोध

बड़ी बात यह है कि जब वैक्सीन के पेटेंट को लेकर भारत और दक्षिण अफ्रीका ने विश्व व्यापार संगठन से अपील की थी तो उसके विरोध में खड़े होने वाले देशों में ब्रिटेन, कनाडा और ब्राजील शामिल थे। भारत और ब्राजील ने तब कहा था कि दुनियाभर में वैक्सीन की तेजी से आपूर्ति के लिए इसके पेटेंट और फार्मास्यूटिकल एकाधिकार को कुछ समय के लिए निलंबित कर देना चाहिए। इससे दुनियाभर की कई कंपनियां बिना किसी बाधा के तेजी से वैक्सीन का निर्माण कर सकेंगी। बाद में ये देश ही भारत से वैक्सीन के लिए गुहार लगाते हुए देखे गए।

ब्रिटेन-कनाडा को भारत से लेने का कोई हक नहीं

इस डील में एक क्लाज है कि एस्ट्राजेनेका उन देशों को भी निर्यात की मंजूरी दे सकता है जो इस समझौते में शामिल नहीं हैं। हालांकि, अमीर देश जैसे ब्रिटेन और कनाडा जो पहले से ही वैक्सीन की बड़ी मात्रा पर कुंडली मारकर बैठे हुए हैं वे भी सीरम इंस्टीट्यूट से वैक्सीन पाने के फिराक में हैं जो गरीब देशों के लिए बनाई जा रही है।