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नया खतरा: कोरोना संक्रमण के बीच अमेरिका में मिला मंकीपॉक्स से संक्रमित शख्स

 17 Jul 2021 04:00 PM

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण के नए-नए वैरिएंट ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। वहीं, अमेरिका से एक परेशानी बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। यहां नई बीमारी मंकीपॉक्स (Monkeypox) का पहला केस मिला है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंकीपॉक्स का पहले केस टेक्सास राज्य में पाया गया है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के मुताबिक, राज्य में यह इस दुर्लभ बीमारी का पहला मामला है। बीमारी एक अमेरिकी निवासी में पाई गई, जिसने हाल ही में नाइजीरिया से अमेरिका की यात्रा की थी। मरीज डलास के एक अस्पताल में भर्ती है।

 

अभी कोई बड़ा खतरा नहीं

डलास काउंटी के स्वास्थ्य अधिकारी क्ले जेनकिंस के मुताबिक, यह बीमारी दुर्लभ जरूरी है, लेकिन इससे अभी कोई बड़ा खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें नहीं लगता कि अभी यह आम जनता के लिए कोई खतरा है। यह केस सभी के लिए दुर्लभ है पर इससे घबराने की जरूरत नहीं है। जल्द ही सुधार दिखने लगेगा। सीडीसी के अनुसार, नाइजीरिया के अलावा, 1970 में पश्चिमी अफ्रीकी देशों में भी इस प्रकार के वायरस ने कहर बरपाया था। अफ्रीकी देशों में इस वायरल बीमारी की चपेट में बड़ी आबादी आ गई थी। वहीं 2003 में अमेरिका में इस बीमारी ने तहलका मचाया था। 

 

दूसरे लोगों के संक्रमित होने का खतरा कम

सीडीसी ने कहा कि मरीज के संपर्क में आने वाले यात्रियों और अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। इसके लिए एयरपोर्ट पर भी जांच की जा रही है। यह बीमारी श्वसन बूंदों के माध्यम से भी एक से दूसरे व्यक्ति में फैलती है। सीडीसी ने बताया कि यात्रा के दौरान सभी मरीज मास्क लगाए हुए थे। इसलिए दूसरे लोगों के संक्रमित होने का खतरा कम है। हालांकि, इनसे जुड़े लोगों की जांच की जा रही है।

 

Monkeypox क्या है और कैसे फैलता है

मंकीपॉक्स वायरस का संबंध स्मॉलपॉक्स यानी चेचक से ही है। इसमें आमतौर पर फ्लू जैसे लक्षणों और लिम्फ नोड्स की सूजन से शुरुआती होती है। धीरे-धीरे चेहरे और शरीर पर के बड़े हिस्से पर दाने उठने लगते हैं। चिंता की बात यह है कि यह बीमारी श्वसन बूंदों के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकती है। इस वायरस का नाम मंकीपॉक्स इसलिए पड़ा क्योंकि ये सबसे पहले साल 1950 में बंदरों में पाए गए थे। इंसानों में इस वायरस के मिलने का पहला मामला 1970 में कांगो में सामने आया था। इस वायरस का फिलहाल कोई इलाज या वैक्सीन नहीं है। अमेरिका में जब 2003 में इसके कई मामले सामने आए थे तो स्मॉलपॉक्स की वैक्सीन से इसे रोकने में मदद मिली थी।