जोरदार शुरुआत के बाद अब संसदीय प्रक्रियाओं में उलझा बाइडेन का एजेंडा

 20 Jul 2021 02:25 AM

वाशिंगटन। मंगलवार 20 जुलाई को व्हाइट हाउस में जो बाइडेन के छह महीने पूरे हो जाएंगे। बीते 20 जनवरी को उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में पहले छह महीनों में राष्ट्रपति के रूप में जो बाइडेन के प्रदर्शन की समीक्षा में मोटी राय ये उभरी है कि जोरदार शुरूआत के बाद अब बाइडेन का एजेंडा संसदीय प्रक्रियाओं में उलझ गया है। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन में छपी एक टिप्पणी में कहा गया है- उनका प्रदर्शन कैसा रहा है, यह सवाल कुछ ऐसा है कि गिलास आधा भरा है या आधा खाली है। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही 1.9 ट्रिलियन का कोरोना राहत पैकेज। इसके बावजूद पहले 100 दिन में उनको लेकर जो उत्साह दिखा

चुनावों को लेकर चिंता

अगले साल नवंबर में सीनेट और हाउस ऑफ फ रिप्रजेंटेटिव के चुनाव होंगे। अगर उनमें डेमोक्रेटिक पार्टी ने और सीटें गंवा दीं, तो फिर बाइडेन के लिए कोई अहम कदम उठाना असंभव हो जाएगा। एक थिंक टैंक के इडी माइकल ब्रोनिंग ने कहा- हम अभी से अगले साल होने वाले चुनाव की चर्चा कर रहे हैं, जबकि 2024 में डोनाल्ड ट्रंप के फिर से राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की संभावनाएं बनी हुई हैं।

उम्मीदें ज्यादा पर संसद में बहुमत है कम

बाइडेन के साथ समस्या यह है कि उनसे पूर्व राष्ट्रपतियों फ्रैंकलीन डी. रुजवेल्ट या लिंडन बी. जॉनसन जैसे दूरगामी कदम उठाने की उम्मीदें पाली गई हैं, जबकि उनके पास संसद में वैसा बहुमत नहीं है, जैसा उन दोनों के साथ रहा था। उन्हें ऐसे माहौल में काम करना पड़ रहा है, जब देश दो धुरियों के बीच बंटा हुआ है। रिपब्लिकन पार्टी अपने शासन वाले राज्यों में बेखौफ हो कर धुर दक्षिणपंथी एजेंडे को लागू कर रही हैं। सीआईए के पूर्व निदेशक लियोन पेनेटा ने कहा है- इसमें कोई शक नहीं है कि मौजूदा कठिन चुनौतियों के बीच लोकतंत्र को कार्यरत बनाए रखने के लिए राष्ट्रपित बाइडेन अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं। लेकिन जमीनी बात यह है कि देश में जो ताकतें सक्रिय हैं, उन्हें नियंत्रित करना बहुत मुश्किल है।

हालात: इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज अधर में

जन संगठन इनविजिबल के सहका र्यकारी निदेशक लीच ग्रीनबर्ग ने कहा है कि कोरोना राहत पैकेज इस बात का गोल्ड स्टैंडर्ड प्रमाण है कि जो बाइडेन अगर चाहें, तो उम्मीदें पूरी कर सकते हैं। लेकिन पिछले दो महीनों का ऊबाऊ अनुभव इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज पर दोनों दलों की सहमति बनाने के लिए चली अनंत वार्ताएं रही हैं। ये पैकेज अपनी मंजिल तक पहुंचेगा, इसकी संभावना कम है, क्योंकि रिपब्लिकन पार्टी की इस मामले में कोई दिलचस्पी नहीं है। नस्लीय न्याय के लिए काम करने वाले संगठन कलर फॉर चेंज के अध्यक्ष राशेड रॉबिनसन ने राय जताई है- (बाइडेन के एजेंडे के) आगे ना बढ़ पाने का कारण मौजूद ढांचा और सिस्टम हैं, जिनमें एक फिलिबस्टर नियम है। ऐसी नीतियों को भी पारित कराने के लिए चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जो रंगभेद खत्म करने के लिए अतीत में उठाए गए उपायों जितने अहम हैं।