अमेरिका ने भारत को दिया झटका, करेंसी मैनिपुलेटर्स की सूची में डाला

 22 Apr 2021 01:44 AM

वाशिंगटन। अमेरिका ने पहले की तरह एक बार फिर भारत को तगड़ा झटका दिया है। उसने भारत को करेंसी मैनिपुलेटर्स (मुद्रा के साथ छेड़छाड़ करने वाले देश) की निगरानी सूची में डाल दिया है। इसपर भारत ने मंगलवार को जवाब देते हुए कहा है कि इसका कोई भी तर्क समझ से परे है। भारत के वाणिज्य सचिव अनूप वाधवा ने कहा, मुझे इसमें कोई आर्थिक तर्क समझ नहीं आता। उन्होंने बताया कि भारत का रिजर्व बैंक एक ऐसी पॉलिसी को अनुमति देता है, जिसके अंतर्गत मार्केट फोर्सेज के अनुरूप मुद्रा का संग्रह किया जाता है। अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने भारत सहित कुल 10 देशों को इस सूची में शामिल किया है। इनमें सिंगापुर, चीन, थाईलैंड, मैक्सिको, जापान, कोरिया, जर्मनी, इटली और मलेशिया तक शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा है कि इन देशों में मुद्रा संग्रहण और इससे जुड़े अन्य तरीकों पर करीबी नजर रखी जाएगी। अधिकारी ने बताया कि भारत का अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस (व्यापार अधिशेष) साल 2020- 21 में करीब पांच अरब डॉलर तक बढ़ गया है। यहां ट्रेड सरप्लस का मतलब है, किसी देश का निर्यात उसके आयात से अधिक हो जाना।

विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप सीमित करने की सलाह

अमेरिका की इस रिपोर्ट में लिखा है कि वस्तुओं के मामले में साल 2020 में भारत का अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार अधिशेष 24 अरब डॉलर था। जिसमें सेवाओं का 8 अरब डॉलर का वित्तीय अधिशेष भी शामिल है। रिपोर्ट में भारत को सलाह देते हुए कहा है कि उसे (भारत) विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप को सीमित करना चाहिए। भारत को ऐसा अधिक रिजर्व जमा किए बिना करना चाहिए। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है, जब अमेरिका ने भारत को लेकर ये कदम उठाया है।

भारत को अब आक्रामक हस्तक्षेप में होगी परेशानी

अर्थशास्त्री कहते हैं कि अमेरिका के इस कदम से भारत को विदेशी मुद्रा बाजार में आक्रामक हस्तक्षेप करने में परेशानी आएगी।अमेरिका के लिए ऐसा करना कोई नई बात भी नहीं है। वह समय-समय पर अलग-अलग देशों को सूची में डालता है। चीन को भी कई बार सूची में शामिल किया गया है। अमेरिका का मानना है कि वह सूची में उन देशों को ही डालता है, जो मुद्रा के अनुचित व्यवहार को अपनाते हैं, ताकि डॉलर के मुकाबले उनकी खुद की मुद्रा का अवमूल्यन हो सके।