5 गुना ज्यादा तेजी से भरेंगे जंग में घायल अमेरिकी सैनिकों के घाव

 21 Feb 2021 12:54 AM

वॉशिंगटन। अमेरिकी वैज्ञानिक एक ऐसा सेल डेवलप कर रहे हैं, जो सैनिकों के घायल होने पर उनके घाव तेजी से भरेंगे। रिसर्चर्स ने कहा कि वे सेल्स के मोडिफिकेशन से अलग टाइप के सेल्स के सीक्वेंस तैयार करने की तकनीक विकसित करने में जुटे हुए हैं। ऐसे में किसी हादसे की स्थिति में उन सेल्स को घाव पर स्प्रे करने के बाद घाव पांच गुना तेजी से भरने लगेंगे। हालांकि इसमें अभी कुछ साल तक का समय लग सकता है। रिसर्चर्स ने बताया कि मांस के सेल अलग होते हैं और स्किन के सेल्स अलग। लेकिन ये प्रोजेक्ट सफल रहा तो अगर स्किन किसी हादसे में हट जाए, जल जाए या नष्ट हो जाए तो तुरंत मांस का हिस्सा खुद को स्किन में बदल लेगा।

सेल रीप्रोग्रामिंग की तैयारी

अमेरिकी सेना की कोशिश है कि वो ऐसा सेल डेवलप करेें और सैनिकों मेेंं डालें, जिससे जंग या किसी परिस्थिति के दौरान अगर वो घायल हो जाएं, तो उनके घाव तेजी से भरें। यानि मामूली खरोंच या घाव उन्हें रोक नहीं सकेगी और वो कुछ ही समय बाद ठीक हो जाएंगे। ऐसा करने के पीछ े मकसद है कि तबाही के मैदान में कम से कम सैनिकों की मौत हो ।

एयरफोर्स का ड्रीम प्रोजेक्ट

ये प्रोजेक्ट अमेरिकी एयरफोर्स ने शुरू किया है, जिसमें मिशीगन यूनिवर्सिटी की टीम भी शामिल है। एयरफोर्स की वेबसाइट पर बताया गया है कि सेना अब सेल री-प्रोडक्शन के प्रोसेस को डी-कोड कर रही है। ताकि जिस भी हिस्से में चोट लगे, वहां तुरंत नई स्किन डेवलप की जा सके। मौजूदा समय में प्राकृतिक तौर पर ये संभव नहीं है।

सेल्स इमेजिंग की जा रही

मिशीगन यूनिवर्सिटी की असोसिएट प्रोफेसर डॉ. इंडिका राजपक्षे ने कहा कि सेल्स की इमेजिंग के लिए माइक्रोस्कोपी की जा रही है। इस काम के पूरा हो जाने के बाद हम घावों को भरने की पूरी प्रक्रिया को समझ सकेंगे। ये एक तरह की क्रांति होगी। अमेरिका के पास संसाधन है और इसका पूरा फायदा उठाना भी चाहिए।

1945 के बाद बदली अमेरिकी सेना की ट्रेनिंग

एक अमेरिकी लेखक ने दावा किया था कि अमेरिकी सेना द्वितीय विश्वयुद्ध के समय खूंखार नहीं थी। क्योंकि उनकी ट्रेनिंग में मानवीय पक्ष ज्यादा थे। ऐसे में 100 में से महज 15 फीसदी सैनिक ही आक्रामक तेवरों वाले होते थे। जिसकी वजह से अमेरिकी सेना को युद्ध जीतने में लंबा समय लग गया। वहीं जर्मनी का हर सैनिक न सिर्फ खूंखार होता था, बल्कि किसी भी दुश्मन को देखते ही मरने और मारने के लिए तैयार रहता था। इस रिपोर्ट के बाद अमेरिकी सेना की ट्रेनिंग में बदलाव किया गया और आज अमेरिकी सील कमांडो दुनिया के सबसे घातक कमांडो माने जाते हैं।