दावा : धरती पर अंतरिक्ष से हर साल गिरती है 5200 टन धूल

 23 Apr 2021 01:34 AM

पेरिस धरती पर लगातार धूल बढ़ रही है। रेगिस्तान का दायरा भी बढ़ रहा है। इसके पीछे बड़े निर्माण कार्य, पेड़ों की कटाई और सूखी नदियां जिम्मेदार हैं। लेकिन इन सबके अलावा अंतरिक्ष से भी धरती पर धूल आती है। यह धूल अलग-अलग ग्रहों और उल्कापिंडों से निकलकर धरती पर गिरती है। हाल ही में हुई एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि धरती पर हर साल अंतरिक्ष से 5200 टन यानी करीब 47.17 लाख किलोग्राम धूल आती है। धूल की हल्की बारिश हर समय होती रहती है। ये एस्टेरॉयड्स और उल्कापिंडों से ज्यादा आती है। हाल ही में अर्थ एंड प्लैनेटरी लेटर्स जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है। इसके अलावा हर साल करीब 10 टन यानी 9071.85 किलोग्राम वजन के पत्थर भी अंतरिक्ष से धरती पर गिरते हैं। इतनी बड़ी मात्रा में धूल और पत्थर आने के बावजूद इनका सटीक अंदाजा लगा पाना बेहद मुश्किल है। क्योंकि हर साल इनके गिरने के बाद बारिश का पानी इन्हें धरती की धूल और मिट्टी से मिला देता है। कुछ जगहों पर ज्यादा मिट्टी जमा होती है तो वहां पर कीचड़ बन जाता है। ऐसे में अंतरिक्ष से आई धूल को नापना कठिन हो जाता है।

अंटार्कटिका में रिसर्च कर रहे हैं वैज्ञानिक

अंतरिक्ष के धूल के कणों को ढूंढ़ने के लिए वैज्ञानिक अंटार्कटिका में जाकर रिसर्च कर रहे हैं। पिछले 20 सालों से फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च के भौतिक वैज्ञानिक जीन दुपराट ने फ्रेंको-इतालवी कॉनकॉर्डिया स्टेशन पर छह शोध अभियानों का नेतृत्व किया है।

जूपिटर के कॉमेट के कारण पृथ्वी पर आती है ज्यादा धूल

वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने के दौरान अधिकतर धूल जल जाती है और रास्ते में खो जाती है। इस तरह कुल मिलाकर हर साल हमारे ग्रह की सतह पर 5,200 टन अंतरिक्ष की धूल गिरती है। अधिकांश (करीब 80 फीसदी) धूल जूपिटर ग्रह के कॉमेट की वजह से पृथ्वी की ओर आती है।