डेमोक्रेटिक पार्टी ने उपराष्ट्रपति माइक पेंस से की मांग, ट्रंप को पद से हटाएं

 11 Jan 2021 12:02 PM

अमेरिकी संसद में 6 जनवरी को हुई हिंसा के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी ने उपराष्ट्रपति माइक पेंस से मांग की है कि वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनके पद से हटाएं। इसके लिए डेमोक्रैट्स ने माइक पेंस को 24 घंटे का समय दिया है। डेमोक्रैट्स ने उपराष्ट्रपति से कहा है कि वह अगले 24 घंटों में 25वें संविधान संशोधन को लागू करें, जिसके तहत ट्रंप को उनकी ड्यूटी पूरी करने में अक्षम करार दिया जाएगा।

डेमोक्रैट्स ने यह साफ कर दिया है कि वे अगल 24 घंटे तक इसका इंतजार करेंगे लेकिन अगर इस दौरान संविधान का 25वां संशोधन लागू नहीं किया गया तो फिर मंगलवार को राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाए जाने का प्रस्ताव लाया जाएगा।

इससे पहले रविवार को अमेरिका में प्रतिनधि सभा की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी ने कहा था कि सदन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही करेगा। वहीं, उन्होंने उपराष्ट्रपति और कैबिनेट से भी ट्रंप को बाहर करने के लिए कदम उठाने का आग्रह करते हुए कहा कि ट्रंप लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। 

दो बार महाभियोग का सामना करने वाले पहले राष्ट्रपति होंगे ट्रंप
पेलोसी ने एक पत्र में सहयोगियों को कहा कि सबसे पहले सदन में मतदान होगा ताकि उपराष्ट्रपति माइक पेंस, ट्रंप को पद से हटाने के लिए 25वें संशोधन के तहत मिली शक्तियों को इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा कि 24 घंटे बाद सदन में महाभियोग के लिए विधेयक लाया जाएगा। महाभियोग की दो बार कार्यवाही का सामना करने वाले ट्रंप इकलौते राष्ट्रपति बन जाएंगे।

महाभियोग की प्रक्रिया तेज होने के साथ ट्रंप पर अपने कार्यकाल के पहले ही पद छोड़ने का दबाव बढ़ गया है। कैलिफोर्निया के पूर्व गवर्नर अर्नोल्ड श्वाजेर्नेगर ने यूएस कैपिटल में ट्रंप समर्थकों के हंगामे और हिंसा की तुलना नाजियों से की है और ट्रंप को एक नाकाम नेता बताया है जो इतिहास में अब तक के सबसे खराब राष्ट्रपति के तौर पर जाने जाएंगे।

2019 में महाभियोग प्रस्ताव पारित हुआ था
सत्ता के दुरुपयोग के आरोप में ट्रंप के खिलाफ प्रतिनिधि सभा में दिसंबर 2019 में महाभियोग प्रस्ताव पारित हुआ था। ट्रंप के खिलाफ भ्रष्टाचारों के आरोपों की कई हफ्ते तक जांच के बाद डेमोक्रैटिक पार्टी के बहुमत वाली प्रतिनिधि सभा ने राष्ट्रपति पर दिसंबर में पद के दुरुपयोग और कांग्रेस (संसद) की कार्रवाई बाधित करने का अभियोग लगाया था। हालांकि दो हफ्ते तक चली सुनवाई के बाद सीनेट में इन आरोपों को खारिज कर दिया गया।