इंसानों को भी राह दिखा सकती है इकोलोकेशन तकनीक

 15 Jun 2021 12:20 AM

लंदन। डरहम यूनिवर्सिटी के अध्ययन में पाया गया है कि आम लोगों को भी चमगादड़ एवं डॉल्फिन की तरह इकोलोकेशन की स्किल सिखाई जा सकती है। इकोलोकेशन वह प्रक्रिया है, जिसके जरिए कुछ प्राणी अपने मुंह से आवाज निकालते हैं और यह आवाज जब आसपास की वस्तुओं से टकराकर वापस आती है तो यह पता चल जाता है कि कौन सी वस्तु कहां पर मौजूद है। इसके जरिए ये प्राणी अपनी राह तय करते हैं।

जीभ हिलाने से पता चल जाएंगी आसपास की वस्तुए

इस तकनीक के इस्तेमाल के लिए व्यक्ति को अपनी जीभ एक सेकेंड में एक या दो बार हिलानी होती है। इससे निकलने वाली आवाज का उपयोग आसपास मौजूद वस्तुओं का पता लगाने के लिए किया जा सकता है। यह आवाज जब किसी वस्तु से टकराकर लौटती है तो तकनीक का इस्तेमाल कर रहे इंसान के दिमाग में एक थ्रीडी इमेज उभरती है, जिससे उसे उस वस्तु के बारे में सटीक जानकारी मिल जाती है। चमगादड़ इस तकनीक का उपयोग रात में भोजन तलाशने के लिए करते हैं।

प्रशिक्षण में मिली सफलता

डॉ. लोरे थैलर की अगुवाई में टीम ने तकनीक सिखाने के लिए लोगों को प्रशिक्षण दिया। दस सप्ताह के दो से तीन घंटे के 20 प्रशिक्षण सत्रों में 12 नेत्रहीन तथा 14 सामान्य दृष्टि वालों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के बाद रिसर्चर्स ने पाया कि नेत्रहीन एवं स्वस्थ आंखों वाले दोनों ही वर्ग के प्रतिभागियों ने इस तकनीक को सीख लिया है और वे जीभ हिलाकर यह पता लगा सकते हैं कि उनके आसपास कितनी दूरी पर किस आकार की वस्तु मौजूद है।