नेतन्याहू युग का अंत: नफ्ताली बेनेट बने इस्राइल के नए प्रधानमंत्री, कहा- अलग-अलग विचारों के लोग काम करेंगे

 14 Jun 2021 12:02 PM

नई दिल्ली। इस्राइल में रविवार को सत्ता पलट हुआ। बेंजामिन नेतन्याहू की 12 सालों की सत्ता को खत्म करते हुए नफ्ताली बेनेट देश के नए प्रधानमंत्री बन गए हैं। दक्षिणपंथी यामिना पार्टी के 49 वर्षीय बेनेट की नई सरकार में 27 मंत्री हैं। बेनेट 120 सदस्यीय सदन में 61 सांसदों के साथ मामूली बहुमत वाली सरकार का नेतृत्व करेंगे। हालांकि, बेनेट खुद भी पीएम बनने से पहले बेंजामिन नेतन्याहू के सहयोगी रह चुके हैं। वह इजरायल के रक्षा, शिक्षा मंत्री रहने के साथ ही साल 2006 से 2008 के बीच चीफ ऑफ स्टाफ भी रह चुके हैं। उन्होंने नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को छोड़ दक्षिणपंथी धार्मिक ज्यूइश होम पार्टी का दामन थाम लिया था और साल 2013 में वह पहली बार संसद पहुंचे थे। साल 2019 तक उन्होंने गठबंधन सरकारों में कई मंत्रालय संभाले। हालांकि, 2020 में वह यामिना पार्टी के मुखिया के तौर पर फिर से संसद पहुंचे।

 

 

अलग-अलग विचारों के लोग काम करेंगे

बेनेट ने संसद में संबोधन के दौरान अपनी सरकार के मंत्रियों के नामों की घोषणा की और इस दौरान नेतन्याहू के समर्थकों ने बाधा भी डाली। प्रतिद्वंद्वी पार्टी के सांसदों के शोर शराबे के बीच बेनेट ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वह अलग-अलग विचार वाले लोगों के साथ काम करेंगे। बेनेट ने कहा कि इस निर्णायक समय हम यह जिम्मेदारी उठा रहे हैं। इस सरकार के अलावा बस यही विकल्प था कि और चुनाव करवाएं जाएं। इससे और नफरत फैलती और देश पर असर पड़ता।

 

मार्च में हुए थे चुनाव

इस साल मार्च में हुए चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को बहुमत नहीं पा सकी थी। दो साल में चार बार हो चुके चुनाव में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद राष्ट्रपति ने नेतन्याहू को सरकार चलाने और 2 जून तक बहुमत साबित करने को कहा था। लेकिन इससे पहले ही विपक्षी गठबंधन ने नेतन्याहू के 12 साल तक लगातार सत्ता में रहने के रिकॉर्ड को यहीं पर विराम देने की रणनीति बनाई।

 

विपक्षी गठबंधन में इस्लामी राम पार्टी भी शामिल

नेतन्याहू की सरकार के खिलाफ बने इस गठबंधन में इस्राइल में अरब समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली इस्लामी राम पार्टी भी शामिल है। विपक्षी गठबंधन में शामिल राम पार्टी इस्राइली अरब मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करती है। उसका मानना है कि फलस्तीनियों को उनका हक मिलना चाहिए और इस्राइल को नई कॉलोनियां बनाने के प्रयास को रोककर यरूशलम पर से दावा छोड़ना चाहिए।

 

ईरान, फलस्तीन पर नेतन्याहू से भी सख्त हैं बेनेट

इस्राइल में विपक्षी गठबंधन की तरफ से पहली पारी में पीएम बनने वाले नफ्ताली बेनेट इस्राइली रक्षा बलों की एलीट यूनिट सायरेत मटकल और मगलन के कमांडो रह चुके हैं। 2006 में वे बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में राजनीति में आए। जिसके बाद वे नेतन्याहू के चीफ ऑफ स्टाफ बनाए गए। बाद में वे न्यू राइट और यामिना पार्टी से भी नेसेट के सदस्य बने। 2012 से 2020 के बीच 5 बार सांसद रह चुके हैं। वह बाद में नेतन्याहू के विरोधी हो गए। 2019 से 2020 के बीच रक्षामंत्री रह चुके नफ्ताली ईरान और फलस्तीन के मुद्दे पर नेतन्याहू से भी ज्यादा कट्टर और सख्त हैं।

 

इजरायल में कैसे चर्चित बने नफ्ताली बेनेट?
बेनेट इजरायल की कट्टर धार्मिक यामिना पार्टी के मुखिया हैं। सन् 1967 की जंग में इजरायल की ओर से कब्जाए गए वेस्ट बैंक इलाके के विलय के वह पक्षधर रहे हैं। यहां तक कि उनके सुझाव पर ही नेतन्याहू ने इस प्रक्रिया की शुरुआत की थी। इसके अलावा ईरान को लेकर भी बेनेट अपने कड़े रुख के लिए जाने जाते हैं। नए बने गठबंधन में विचारधारा के स्तर पर तमाम मतभेद हैं। इसके बाद भी सभी दलों ने विवादित मुद्दों को छोड़कर कॉमन इशूज पर फोकस करने का फैसला लिया है। कोरोना संकट के चलते पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर सभी दलों का फोकस है।

 

2013 में छोड़ी अमेरिकी नागरिकता

मिलिट्री कमांडो यूनिट में सेवाएं दे चुके बेनेट का जन्म इजरायल के हाइफा में हुआ था। साल 2013 में ही अपनी अमेरिकी नागरिकता छोड़ दी थी और उसके बाद वह इजरायली राजनीति में घुसे। राजनीति में आने से पहले बेनेट एक टेक कंपनी चलाते थे। यह स्टार्टअप उन्होंने सन् 1999 में शुरू किया था, जिसका नाम Cyota था। हालांकि, साल 2005 में बेनेट ने अपनी इस कंपनी को अमेरिकी सिक्योरिटी फर्म RSA को 14.5 करोड़ डॉलर में बेच दिया था। बेनेट ने यरुशलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की हुई है।