अब मंगल की धरती पर कदम रखेगा नासा का हेलिकॉप्टर

 04 Apr 2021 01:08 AM

वॉशिंगटन। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के परसेवरेंस रोवर के साथ मंगल ग्रह पर गया ‘इनगेनुइटी’ हेलिकॉप्टर कुछ ही दिन में सतह पर होगा। अब तक वह रोवर से जुड़कर चार्ज हो रहा था। रोवर से ही ऊर्जा लेकर अपने थर्मोस्टैट-कंट्रोल्ड हीटर के इस्तेमाल से 45 डिग्री फॉरेनहाइट के तापमान को कायम रखे थे। मंगल की बर्फीली रातों में यह तापमान बनाए रखना अहम होता है ताकि इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चलते रहें।

रोवर से अलग होकर टेस्ट

यह सौर ऊर्जा से भी चार्ज होगा, जो मंगल पर धरती की तुलना में कम है, लेकिन इसमें हाईटेक सोलर पैनल लगे हैं जो यह काम आसान कर देंगे। बाद में इसका तापमान कम रखा जाएगा ताकि बैटरी ज्यादा खर्च न हो। मंगल पर रात को 130 डिग्री एफ तक तापमान गिर सकता है और पहली रात इसे झेलने के बाद अगले दिन टीम देखेगी कि इसका प्रदर्शन कैसा रहा। न सिर्फ यह देखा जाएगा कि क्या हेलिकॉप्टर चल रहा है, बल्कि इसके सोलर पैनल, बैटरी की हालत व चार्ज चेक करेगी।

क्यों है जरूरत?: मंगल पर रोटरक्राμट की जरूरत इसलिए है क्योंकि वहां की अनदेखी सतह बेहद ऊबड़-खाबड़ है। मंगल की कक्षा में चक्कर लगा रहे आॅर्बिटर ज्यादा ऊंचाई से एक सीमा तक ही साफ-साफ देख सकते हैं। वहीं रोवर के लिए सतह के हर कोने तक जाना मुमकिन है। ऐसे में ऐसे रोटरक्राμट की जरूरत होती है जो उड़ कर मुश्किल जगहों पर जा सके और हाई-डेफिनेशन तस्वीरें ले सके।

मोटर और सेंसर को किया जाएगा टेस्ट

इस कदम को पूरा करने के बाद इसके रोटर ब्लेड्स को अनलॉक किया जाएगा और इसके मोटर और सेंसर टेस्ट किए जाएंगे। मंगल के 30 दिन (धरती के 31 दिन) बाद इसकी एक्सपेरिमेंटल μलाइट की कोशिश होगी। नासा के मुताबिक अगर हेलिकॉप्टर टेक आॅफ और कुछ दूर घूमने में सफल रहा तो मिशन का 90%सफल रहेगा। अगर यह सफलता से लैंड होने के बाद भी काम करता रहा तो चार और μलाइट्स टेस्ट की जाएंगी। यह पहली बार किया जा रहा टेस्ट है इसलिए वैज्ञानिक इसे लेकर बेहद उत्साहित हैं और हर पल कुछ नया सीखने की उम्मीद में हैं।