फ्रेंच मीडिया रिपोर्ट के दावे के बाद फिर बाहर आया राफेल का जिन्न

 06 Apr 2021 01:26 AM

पेरिस। फ्रेंच की मीडिया रिपोर्ट के दावे के बाद एक बार फिर राफेल का सोया हुआ जिन्न बोतल से बाहर आ गया है। बता दें कि फ्रांस की समाचार वेबसाइट ‘मीडिया पार्ट’ ने एक बार फिर राफेल लड़ाकू विमान सौदे में भ्रष्टाचार की आशंका जताई है और कई सवाल भी उठाए हैं। फ्रेंच भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी एएफए की जांच रिपोर्ट के हवाले से प्रकाशित खबर के मुताबिक, दैसो एविएशन ने कुछ बोगस भुगतान किए हैं। कंपनी के 2017 के खातों के आॅडिट में 5 लाख 8 हजार 925 यूरो (4.39 करोड़ रुपए) क्लाइंट गिμट के नाम पर खर्च दर्शाए गए। मगर इतनी बड़ी धनराशि का कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। मॉडल बनाने वाली कंपनी का मार्च 2017 का एक बिल ही उपलब्ध कराया गया। एएफए के पूछने पर दैसो एविएशन ने बताया, उसने राफेल विमान के 50 मॉडल एक भारतीय कंपनी से बनवाए। इन मॉडल के लिए 20 हजार यूरो (17 लाख रुपए) प्रति नग के हिसाब से दिया गया। हालांकि, यह मॉडल कहां और कैसे इस्तेमाल किए गए, इसका कोई प्रमाण नहीं दिया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि मॉडल बनाने का काम कथित तौर पर भारत की कंपनी डेफसिस सॉल्यूशंस को दिया गया। यह कंपनी दैसो की भारत में सब- कॉन्ट्रैक्टर कंपनी है।

सुषेण गुप्ता की भूमिका संदिग्ध, पहले भी किए जा चुके हैं गिरμतार

भारत की कंपनी डेफसिस सॉल्यूशंस का स्वामित्व रखने वाले परिवार से जुड़े सुषेण गुप्ता रक्षा सौदों में बिचौलिया रहे हैं और दैसो के एजेंट भी थे। सुषेण गुप्ता को 2019 में अगस्ता-वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर खरीद घोटाले की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरμतार भी किया था। मीडिया पार्ट के अनुसार सुषेण गुप्ता ने ही दैसो एविएशन को मार्च 2017 में राफेल मॉडल बनाने के काम का बिल दिया था।

राफेल विमान के सौदे को मिल चुकी है सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी

कांग्रेस ने ने आरोप लगाया था कि जिस राफेल को यूपीए सरकार ने 526 करोड़ में लिया था, उसे एनडीए सरकार ने 1,670 करोड़ प्रति विमान की दर से लिया। कांग्रेस ने सवाल उठाया था कि सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लि. को इस सौदे में शामिल क्यों नहीं किया गया? इस फैसले के खिलाफ लगाई गई याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने 14 नवंबर 2019 को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि इस मामले की जांच की जरूरत नहीं है।

आरोप को बताया था बेबुनियाद

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हमें नहीं लगता है कि राफेल लड़ाकू विमान सौदा मामले में किसी एफआईआर या जांच की जरूरत है। अदालत ने 14 दिसंबर 2019 को राफेल सौदे की प्रॉसेस और सरकार के पार्टनर चुनाव में किसी तरह के फेवर के आरोपों को बेबुनियाद बताया था।

राफेल खरीद सौदे की सच्चाई सभी के सामने आ चुकी है

इस मामले को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर एक बार फिर निशाना साधा है। पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, इस पूरे लेन-देन को गिμट टू क्लाइंट की संज्ञा दी गई। अगर ये मॉडल बनाने के पैसे थे, तो इसे गिμट क्यों कहा गया? क्या ये छिपे हुए ट्रांजेक्शन का हिस्सा था। ये पैसे जिस कंपनी को दिए गए, वो मॉडल बनाती ही नहीं है। 60 हजार करोड़ रुपए के राफेल रक्षा सौदे से जुड़े मामले में सच्चाई सामने आ गई है। ये हम नहीं, फ्रांस की एक एजेंसी कह रही है।

कांग्रेस ने केंद्र से किए 5 सवाल

􀂄 1.1 मिलियन यूरो के जो क्लाइंट गिμट डसॉल्ट के आॅडिट में दिखा रहा है, क्या वो राफेल डील के लिए बिचौलिए को कमीशन के तौर पर दिए गए थे?

􀂄 जब 2 देशों की सरकारों के बीच रक्षा समझौता हो रहा है, तो कैसे किसी बिचौलिए को इसमें शामिल किया जा सकता है?

􀂄 क्या इस सबसे राफेल डील पर सवाल नहीं खड़े हो गए हैं?

􀂄 क्या इस पूरे मामले की जांच नहीं की जानी चाहिए, ताकि पता चल सके कि डील के लिए किसको और कितने पैसे दिए गए? 􀂄 क्या पीएम मोदी इस पर जवाब देंगे?