6 घंटे से कम सोने वाले हो सकते हैं पागलपन के शिकार

 22 Apr 2021 01:32 AM

लंदन। ब्रिटिश वैज्ञानिकों का कहना है कि कम सोने वाले लोग मानसिक तौर पर बीमार हो सकते हैं और उनके पागल होने की संभावना बढ़ जाती है। 6 घंटे से कम सोने वाले लोग मानसिक विक्षिप्त हो सकते हैं। मंगलवार को ब्रिटिश मेडिकल जर्नल नेचर कम्यूनिकेशन में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक 6 घंटे से कम सोने वाले लोगों में डिमेंशिया नाम की बीमारी हो सकती है। डिमेंशिया एक मस्तिष्क रोग है, जिसके अंतर्गत एक मरीज कई तरह की मानसिक बीमारियों से परेशान हो जाता है। जिनमें भूलने की बीमारी, अल्जाइमर, बोलने की क्षमता में कमी होना, चिड़चिड़ापन, फैसला करने में गलती, व्यक्तित्व में बदलाव समेत कई तरह की बीमारी शामिल हैं। वैज्ञानिकों ने कहा आपकी उम्र कुछ भी हो, आपको कम से कम 7 घंटे निश्चित तौर पर सोना चाहिए लेकिन अगर आप 50 साल से ज्यादा उम्र के हैं तो 6 घंटे की नींद आपके लिए खतरनाक साबित हो सकती है। 6 घंटे से कम सोने वाले लोगों में डिमेंशिया होने का खतरा 30 फीसदी से ज्यादा बढ़ जाता है। 50 साल की उम्र वाले लोग अगर 6 घंटे से कम की नींद लेते हैं तो उन्हें कार्डियो मेटाबोलिक बीमारी और मानसिक बीमारी भी हो सकती है, जिसे डिमेंशिया के नाम से जाना जाता है। 1985 से चल रहा था रिसर्च फ्रेंच नेशनल हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट के लेखकों ने ब्रिटेन के लंदन में इस विषय पर 1985 से रिसर्च करना शुरू किया। जिसमें ब्रिटेन के 7959 लोगों को शामिल किया गया था। इस रिसर्च में यूनिवर्सिटी आॅफ लंदन भी अपने आंकड़े दे रहा था।

8 हजार लोगों पर रिसर्च

ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने 35 सालों तक करीब 8 हजार से ज्यादा ब्रिटिश नागरिकों पर रिसर्च करने के बाद ये निष्कर्ष निकाला है कि कम सोने वाले लोगों के पागल होने की संभावना ज्यादा है। हालांकि, वैज्ञानिकों ने कहा कि वो इसके पीछे की वजह को तलाशने में नाकामयाब रहे हैं। इस रिसर्च के दौरान रिसर्च में शामिल लोग कितनी देर सोते हैं और कितनी देर गहरी नींद में सोते हैं, उसपर नजर रखी गई। इस दौरान 3900 लोगों ने नींद पर नजर रखने वाली घड़ी भी पहन रखी थी। करीब 35 साल लंबा ये रिसर्च चला और फिर वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे कि 6 घंटे से कम सोने वाले लोग डिमेंशिया के शिकार हो सकते हैं।