अमेरिकी सीनेट ने पास किया चीनी टेक्नोलॉजी से निपटने वाला विधेयक

 10 Jun 2021 01:48 AM

वॉशिंगटन। अमेरिका की संसद ने बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा खासकर चीन की तरफ से मिल रही चुनौती के मद्देनजर देश में अर्धचालक उत्पादन और कृत्रिम बुद्धिमता के विकास तथा अन्य प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए मंगलवार को एक विधेयक को भारी मतों से मंजूरी दी। इस विधेयक के पक्ष में 68 और विरोध में 32 मत पड़े, जो दर्शाता है कि आर्थिक मोर्चे पर चीन का सामना करने का मुद्दा कांग्रेस में दोनों पार्टियों को कैसे एकजुट करता है। मत विभाजन के युग में यह एक दुर्लभ घटना है जब डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों पर लगातार सीनेट के उन नियमों में बदलाव को लेकर दबाव बना रहा है, जो रिपब्लिकनों की तरफ से विरोध और किसी मुद्दे पर गतिरोध को दूर कर सके। इस विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू वाणिज्य मंत्रालय को कांग्रेस द्वारा पूर्व में अधिकृत शोध एवं प्रोत्साहन कार्यक्रमों के माध्यम से अर्धचालक विकास एवं उत्पादन के लिए 50 अरब डॉलर का आपात आवंटन है।

शुरुआती 5 वर्षों में खर्च की जाएगी अधिकांश राशि

विधेयक में प्रस्तावित कुल लागत खर्च को करीब 250 अरब डॉलर तक बढ़ा देगा, जिसमें से अधिकांश राशि शुरुआती 5 वर्षों में खर्च की जाएगी। समर्थकों ने इसकी व्याख्या देश में दशक बाद वैज्ञानिक अनुसंधान में किए गए सबसे बड़े निवेश के तौर पर की है। यह विधेयक ऐसे वक्त में लाया गया है जब वैश्विक स्तर पर अर्धचालकों का उत्पादन 1990 के 37 प्रतिशत से घटकर अब करीब 12 प्रतिशत पर आ गया है और उस समय में जब चिप की कमी ने अमेरिकी आपूर्ति शृंखला को अत्यधिक संवेदनशील बना दिया है।

इधर, चीन ने प्रतिस्पर्धा संबंधी अमेरिकी विधेयक की निंदा की

बीजिंग। चीन ने बुधवार को अमेरिका के उस विधेयक की निंदा की, जो चीन व अन्य देशों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के मद्देनजर अमेरिकी प्रौद्योगिकी को मजबूत करने पर केंद्रित है। बीजिंग ने कहा, विधेयक चीन की घरेलू राजनीति पर परोक्ष हमला और इसके विकास को रोकने पर केंद्रित है। चीन की विदेश मामलों की समिति ने अमेरिकी नवोन्मेष एवं प्रतिस्पर्धा विधेयक पर कड़ी आपत्ति व्यक्त किया। चीन ने कहा, अमेरिका के आधिपत्य को बनाए रखने के उद्देश्य से इस विधेयक में मानवाधिकार के बहाने चीन से तथाकथित खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है, जिससे कि चीन की घरेलू राजनीति में हस्तक्षेप किया जा सके और चीन को विकास के वैध अधिकार से वंचित किया जा सके। इसमें कहा गया कि किसी को भी यह नहीं सोचना चाहिए कि चीन ऐसी किसी चीज को स्वीकार करेगा, जो उसकी संप्रभुता, सुरक्षा या विकास हितों को नुकसान पहुंचाती हो।