सिटी हॉस्पिटल में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की शिकायतों का ओमती थाने में तांता, अब तक 8 दर्ज

 16 May 2021 12:34 AM

जबलपुर । सिटी अस्पताल में भर्ती मरीजों के 2 परिजन पहले सुप्रीम कोर्ट सीबीआई जांच की मांग करने पहुंच चुके हैं, अब ओमती थाने में शिकायतकर्ताओं की खासी भीड़ पहुंच रही है। उनका कहना है कि मरीज के परिजन की मृत्यु नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाने से हुई है। थाने में अभी तक कुल 8 शिकायत बीते एक सप्ताह में दर्ज की जा चुकी हैं। इसके अलावा कुछ परिजनों का कहना है कि मरीज की मृत्यु होने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने उनके पिता की मृत्यु होने की जानकारी नहीं दी और उनसे इलाज के नाम पर रूपए वसूलते रहे। परिजनों से पहुंचने वाली सभी शिकायतों को एसआईटी ने सिटी अस्पताल की जांच में शामिल किया है। जानकारी के अनुसार थाने में नरसिंहपुर, मंडला, छिंदवाड़ा व कुछ शिकायत जबलपुर जिले से प्राप्त हुई है। परिजनों की शिकायत के बाद सिटी अस्पताल में मरीजों की जान से होने वाले खिलवाड़ा की पोल धीरे-धीरे खुलने लगी है। वहीं कई लोग ऐसी घटनाओं पर चुप्पी साधे हुए हैं।

चौथा रेमडेसिविर इंजेक्शन लगते ही पति की हुई मौत

मढ़ाताल निवासी मनोज शिवहरे की मौत सिटी अस्पताल में इलाज के दौरान हो गई थी। पत्नी नीते शिवहरे ने ओमती थाने में शिकायत किया कि पति को मामूली बुखार व कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्हें इलाज के लिए सिटी अस्पताल भर्ती किया गया। नीतू ने शिकायत किया है कि अस्पताल प्रबंधन ने उनसे ढाई लाख रूपए जमा करवाए। पति को जैसे ही चौथा रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाया वैसे ही उनकी मौत हो गई।

मरीज को 6 की जगह 9 रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाए

मंडला निवासी जगदीश कुमार के परिवार वालों ने ओमती थाने में दी गई शिकायत में बताया कि 21 अप्रैल को जगदीश की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई और उन्हें जबलपुर के सिटी अस्पताल में इलाज कराने भर्ती किया गया। 19 दिन तक वह आईसीयू वॉर्ड में भर्ती थे। अस्पताल के स्टाफ ने उन्हें 6 की बजाय 9 रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाए लेकिन इसके बाद भी उनकी मौत हो गई। अस्पताल ने 19 दिन के इलाज के लिए 6 लाख 83 हजार रूपए का बिल हाथ में थमा दिया था।

पिता की हो चुकी थी मौत, इलाज के नाम पर भी वसूलते रहे पैसे

गाडरवाड़ा निवासी रंजीत सिंह ने ओमती थाने में शिकायत दर्ज कराया कि उनके पिता नरवर सिंह की मौत नकली रेमडेसिविर लगाने से हुई है। रंजीत ने बताया कि उनके पिता की मृत्यु के बाद भी अस्पताल प्रबंधन उनसे इलाज के नाम पर पैसे वसूलता रहा। रिश्तेदार ने जब उन्हें फोन कर पिता की मृत्यु की सूचना दिया तब उन्हें पता चला और व अस्पताल पिता का अंतिम संस्कार करने गए।