जबलुपर में यहां से पाएं कोविड प्लाज्मा और डोनेट भी करें, जानें कोरोना से किस तरह जान बचा सकती है प्लाज्मा थेरेपी

 22 Apr 2021 02:10 PM

जबलपुर. शहर में तेजी से बढ़ती हुई कोविड प्लाज्मा की डिमांड को देखते हुए रेड क्रॉस सोसायटी ने अनूठी पहल शुरू की है। हाल ही में जिला प्रशासन व रेड क्रॉस सोसायटी ने अपील की है कि कोविड से 28 दिनों के भीतर ठीक होने वाले लोग प्लाज्मा डोनेट करें। इससे प्लाज्मा थेरेपी की जरिए कई लोगों की जान बचाई जा सकती है।

कोरोनाकाल में बनें जीवनदाता

रेड क्रॉस सोसायटी से अंकित पहारिया ने बताया कि वे लगातार शहर में ठीक हुए लोगों से अपील कर रहे हैं कि अपना प्लाज्मा डोनेट करें। इसके लिए खासतौर पर व्यवस्थाएं की गई हैं। प्लाज्मा दान करने की प्रक्रिया पीड़ारहित व सुरक्षित होती है। ऐसे में 28 दिन के अंदर ठीक हो चुके लोग ज्यादा से ज्यादा प्लाज्मा दान कर लोगों की जान बचा सकते हैं। 

प्लाज्मा दान करने वालों को मिलेगी ये सुविधा

  • अगर आपके पास वाहन की सुविधा नहीं है, तो रेडक्रॉस आपको पिक एंड ड्रॉप सुविधा देगा।
  • आपके सारे टेस्ट निशुल्क होंगे।
  • आपको जिला प्रशासन  की तरफ से सम्मानित किया जाएगा।

प्लाज्मा दान या प्राप्त करने के लिए इन नंबरों पर संपर्क करें

  • अंकित पहारिया (7000286001)
  • राहुल तिवारी (9131275546)

प्लाज्मा थेरेपी क्या है?

डॉक्टर्स के मुताबिक प्लाज्मा थेरेपी, कोरोनोवायरस संक्रमण के इलाज के लिए एक प्रायोगिक प्रक्रिया है। इस इलाज में प्लाज्मा, खून का पीला लिक्विड हिस्सा, उस व्यक्ति से निकाला जाता है जो संक्रमण से उबर गया है और उस रोगी को इंजेक्शन से लगाया जाता है जो उस बीमारी से पीड़ित है। प्लाज्मा में एंटीबॉडी होते हैं जो रोगी को वायरस से लड़ने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, मेडिकल एक्सपर्ट्स ये भी कहते हैं कि प्लाज्मा थेरेपी को कोविड-19 के इलाज के लिए “प्राथमिक चिकित्सा” के रूप में नहीं माना जाना चाहिए और इसका उपयोग केवल स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल दवाओं के साथ किया जाना चाहिए।

कौन कर सकता है प्लाज्मा दान?

COVID-19 के मामले में, एक प्लाज्मा देने वाले को तकरीबन 28 दिनों में संक्रमण से उबर जाना चाहिए और 18 से 60 वर्ष की आयु के अंदर ही होना चाहिए. डोनर का न्यूनतम वजन 50 किलोग्राम होना चाहिए और किसी भी संक्रामक या पुरानी बीमारियों से पीड़ित नहीं होना चाहिए।