अब विद्युत शवदाहगृह जरूरी, रानीताल का जमींदोज, हाथीताल मुक्तिधाम जर्जर

 05 May 2021 12:32 AM

जबलपुर । जिस गति से इन दिनों मौतों का ग्राफ बढ़ा है उसे देखते हुए श्मशान पर वेटिंग की स्थितियां निर्मित हुई हैं। ऐसे में विद्युत शवदाहगृह की जरूरत महसूस होने लगी है। शहर में 15 साल पहले रानीताल में विद्युत शवदाहगृह बनाया गया था मगर इसमें किसी ने भी अपने परिजन का अंतिम संस्कार करवाने में रुचि नहीं दिखाई। वहीं समय के साथ जब यह श्मशान छोटा पड़ने लगा तो इस विद्युत शवदाहगृह को जमींदोज कर दिया गया। वहीं हाथीताल में जरूर विद्युत शवदाहगृह है मगर इसकी व्यवस्थाएं सीमित हैं और यह जर्जर स्थिति में भी है। विगत सप्ताह नगरीय कल्याण एवं विकास िवभाग के प्रमुख सचिव ने नगर निगम को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि 15 दिनों में विद्युत श्मशान गृह की व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाए।गौरतलब है कि विगत सप्ताह हाथीताल श्मशान गृह में एक शव अधजली स्थिति में फंस गया था जिससे परिजनों को बेहद अप्रिय स्थितियों का सामना करना पड़ा था। नगरीय प्रशासन ने सभी निकायों को जारी किया है पत्र वहीं नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने सभी नगरीय निकायों को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि उनकी सीमा में यदि विद्युत शवदाहगृह बना हुआ है और वह संचालित नहीं है तो उसे हर हाल में 15 दिनों में चालू कर लिया जाए।

प्रदूषण कम करने प्रदेश सरकार की पहल

प्रदेश सरकार श्मशानों से हो रहे प्रदूषण को समाप्त करने के लिए विद्युत शवदाहगृहों की स्थापना पर जोर दिया है। 15 साल पहले रानीताल में बना विद्युत शवदाहगृह का अस्तित्व ही अब समाप्त हो चुका है। जब शवदाहगृह बना था तो लोगों की अरुचि ने इसे कभी चालू ही नहीं होने दिया और जंग ने पूरी मशीनरी खराब कर दी। वहीं गुप्तेश्वर में बना विद्युत शवदाहगृह कभी भी बंद हो जाता है। पिछले दिनों यहां एक मृत देह फंस गई थी जिसके बाद यहां पर लोगों ने अंतिम संस्कार करवाना ही बंद कर दिया था।