ट्रेंचलैस से धसक रही रोड, पुणे से बुलवाए इंजीनियर

 16 May 2021 12:05 AM

जबलपुर । शहर में सीवर लाइन डालने के लिए उपयोग की जा रही ट्रेंचलैस तकनीक कारगर साबित नहीं हो रही है। गंगासागर-मदनमहल रोड में 2 साल का दंश झेलने के बाद अब इसे तीन पत्ती पर शुरू किया गया था जिसमें यहां पर सड़क ही धंस गई थी। अब चौराहे को क्रॉस करने के लिए पुणे से इंजीनियरों की टीम को बुलवाया गया है जो सुरक्षित तरीके से अंदर ही अंदर खुदाई कर यहां से सीवर लाइन पास करवाएगी। ट्रेंचलैस तकनीक बेहद मंहगी है और इसमें 40 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से खुदाई करवाई जाती है। इसमें मशीनों के द्वारा बिना सड़क खोदे अंदर ही अंदर खुदाई होती है। जब 2 साल पहले गंगासागर-मदनमहल रोड के करीब 300 मीटर के फासले में इस तकनीक से काम शुरू करवाया गया था तो यहां के रहवासी जब तक यह काम चला परेशान रहे। अभी भी यहां पर सड़क धंसने के मामले सामने लगातार आ रहे हैं।

15 साल में 50 फीसदी हो पाया काम

वर्ष 2006 से चल रहे सीवर लाइन के काम को 15 साल हो चुके हैं मगर इसकी प्रगति अभी तक 50 फीसदी ही है। 231 करोड़ का यह प्रोजेक्ट अब 600 करोड़ तक पहुंच गया है। 125 किमी अमृत योजना की लाइन से चंद घर भी नहीं जोड़े गए है। इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों में 5 सीवरेज प्लांट बनाए जाने थे जिसमें से कठौंदा में 1 सीवर प्लांट बना है जिससे चेरीताल के आसपास के करीब 5 हजारपरिवारों के सीवर टैंक से लाइन जोड़ी गई थी। कुछ ही समय में यह प्रयोग असफल साबित हुआ और लोगों की शिकायत रही कि उनके घरों में गंदगी लौट रही है।

क्या है ट्रेंच प्रणाली

जमीन के अंदर ही अंदर खुदाई करते हुए इसके मलबे को तत्काल हटाया जाता है। खुदाई कर सीवर लाइन डाल दी जाती है। यह प्रणाली बेहद मंहगी है। इसका खर्च 40 हजार रुपए प्रति मीटर आता है। नगर निगम का लक्ष्य है कि लॉक डाउन पीरियड में यह काम कर लिया जाए जो कि है तो मुश्किल पर यदि इच्छा शक्ति और काम की गति तेज रही और लॉक डाउन महीनों चला तो ये संभव भी हो सकता है।

इतने इलाके में होगी ट्रैंचलैस तकनीक

नौदरापुल से लेकर पुराने बस स्टैंड तक ट्रेंचलैस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस काम में ढाई करोड़ रुपए का खर्च आना है। यदि पुरानी तकनीक यानि सड़क खोदकर काम किया जाता तो यह काम डेढ़ करोड़ में हो सकता था मगर इसके लिए महीनों का समय और नागरिकों को परेशानी होती। इसमें 44 हजार रुपए प्रति मीटर तो खुदाई का ही खर्च आता है शेष 5-6 हजार रुपए पाइप डालने में खर्च होते हैं। इसमें 500 एमएम का सीवर लाइन का पाइप डलना है। इसके लिए नौदरापुल के पास सबसे गहरी यानि 16 फीट तक खुदाई होगी जो कि बस स्टैंड आते-आते 10 फीट गहराई में खोदी जाएगी। इससे सिविक सेंटर और आसपास का सीवरेज वेस्ट सीधे कठौंदा प्लांट पहुंचेगा।