प्रदेश के चार दिव्यांगों ने विश्व में लहराया जीत का परचम

 02 Dec 2020 08:56 PM

जबलपुर। अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस में हम दिव्यांगों के अधिकार की बात करते हैं, लेकिन प्रदेश में ऐसे भी दिव्यांग हैं, जिन्होंने प्रदेश का नाम देश ही नहीं बल्कि विश्व में रौशन किया है। तीन सालों ने जूडो के चार दिव्यांग खिलाड़ियों ने 4 स्वर्ण, 1 रजत और 2 कांस्य पदक देश के नाम कर चुके हैं। खिलाड़ियों ने बातचीत में बताया कि कोविड के दौरान उन्होंने जूडो की प्रेक्टिस बंद नहीं किया, बल्कि घर के आंगन को ही खेल के मैदान में परिवर्तित कर लिया और गांव व घर के आस-पास के बच्चों को खेल भी सिखाया। 
गौरतलब है कि हर साल 3 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के रूप में मनाते हैं। जिसमें हम समाज में रहने वाले दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार को बढ़ावा देने के साथ उनके राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक व सांस्कृतिक जीवन में समानता की बात करते हैं। 
गाय-भैंस के तबेले को बनाया मैंच रिंग
नेशनल चैंपियन कपिल परमार ने बताया कि वह सीहोर का रहने वाला है। पिता आॅटो चालक हैं। कोविड के दौरान आर्थिक तंगी के चलते पिता ने आॅटो बेचा और चाय की दुकान खोली। कपिल जूडो 60 किग्रा खेलता है। कोविड में स्टेडियम बंद था, इसलिए उसने जूडो की प्रेक्टिस के लिए गाय-भैंस के तबेले को जूडो मैंच की रिंग में परिवर्तित किया। कपिल ने 1 गोल्ड व 1 सिल्वर पदक देश के नाम किया है।
52 किग्रा में पदक जीतने की तैयारी हुई शुरू
होशंगाबाद की रहने वाली स्वाति शर्मा बताती है कि उसने नेशनल में 2 गोल्ड देश के नाम किया है। पहले वह 48 किग्रा में खेलती थी, जिसमें उसने पदक जीता। अब वह 52 किग्रा खेलने की तैयारी कर रही है। स्वाति के पिता शासकीय कर्मचारी से रिटायर्ड हैं।
विश्व में 14 रैंक हासिल करने वाली पहली लड़की  
होशंगाबाद निवासी पूनम शर्मा 63 किग्रा में जूडो खेलती हैं और विश्व में 14वीं रैंक में अपना स्थान बना लिया है। पूनम ने अभी तक 2 गोल्ड, 2 सिल्वर मैडल देश के नाम कर चुकी हैं। पूनम बताती है कि उसके माता-पिता दोनों लकवा से ग्रस्त हैं और घर की जिम्मेदारी उसके एकलौते भाई के उपर है। भाई पुलिस में एएसआई के पद पर नियुक्त है।

कॉलोनी के बच्चों को जूडो की दे रहा ट्रेनिंग
भोपाल निवासी सैयद एहतराम के पिता नगर निगम में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी हैं। सैयद बताता है कि उसने देश के नाम 1 सिल्वर और 1 कांस्य पदक किया है। कोविड के दौरान सैयद ने घर के आंगन को जूडो रिंग में परिवर्तित किया और घर के आस-पास रहने वाले बच्चों को जूडो सिखा रहा है।

सभी बच्चों को फिटनेस टेस्ट के आधार पर नेशनल और इंटरनेशनल के लिए सिलेक्ट किया जाता है। सिलेक्ट किए गए चारों खिलाड़ियों का डाइट प्लान मैं स्वयं बनाता हूं और उसे समय-समय पर चैक करता हूं।
- प्रवीण भटेले, कोच