कोविड का असर : सूने स्टेशन पर यात्रियों की राह देख रहे सारी दुनिया का बोझ उठाने वाले

 04 May 2021 12:16 AM

जबलपुर । 90 के दशक में अमिताभ बच्चन की फिल्म कुली से अनेक लोगों ने प्रेरणा ली। वहीं कई ने इसे बेहतर जॉब समझा और कुली बनने उत्सुकता दिखाई। कोविड के कारण अब वे पाई-पाई को मोहताज हैं। इतना ही नहीं स्टेशन पर उनकी बोहनी तक नहीं हो रही है। गौरतलब है कि बड़ी संख्या में स्टेशन पर यात्रियों का सामान ढोने वाले कुली जबलपुर स्टेशन पर अपनी और परिवार की परवरिश कर रहे हैं। अब कोरोना के कारण यात्रियों की संख्या कम होने से हालात् बदल गए हैं और अपनी आधी आयु व्यतीत कर चुके कुली को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

4 महिला कुली थीं तैनात

जबलपुर स्टेशन पर महिला कुली को देख पहले यात्रियों को आश्चर्य जरूर हुआ। लेकिन 1 के बाद अब 4 महिला कुली हैं। संक्रमण के भय से इन्होंने एक पखवाड़े से स्टेशन आना बंद कर दिया है। इनमें संतरा भारती, रीना, संध्या और लक्ष्मी प्रजापति बाकायदा यात्रियों का लगेज उठाकर भरण-पोषण कर रहीं थीं।

काम न होने से 70 नहीं पहुंच रहे

जबलपुर स्टेशन पर रेलवे द्वारा 100 कुली को तैनात किया गया था। बाकायदा इन्हें लाइसेंस के बाद बिल्ला भी दिया था। इनमें से 70 कुली यात्री न मिलने से स्टेशन नहीं आ रहे हैं। इनमें से कई अपने गांव लौट गए हैं। वर्तमान में 30 कुली स्टेशन पर यात्रियों की बाट जोह रहे हैं।

सिर्फ पास और अस्पताल की सुविधा

रेलवे द्वारा भर्ती किए गए कुली को स्टेशन आने-जाने के लिए सिर्फ पास जारी किए गए हैं। इसके अलावा अस्पताल की सुविधा है। हालांकि दो शिफ्ट में ड्यूटी के दौरान आराम के लिए रेस्ट हाउस भी बना है। पहले औसतन एक कुली 4 से 5 सौ रुपए तक कमा लेता था। अब एकाध लगेज में 50 रुपए से ज्यादा नहीं मिल पाते। वर्तमान में संकट से जूझ रहे कुली कहते हैं कि इस विकट परिस्थिति में उन्हें रेल प्रशासन से मानदेय या राशन मिल जाए तो काफी राहत मिल सकेगी।