जबलपुर हाईकोर्ट का फैसला- आर्थिक अपराध को आपसी विवाद बताकर पुलिस पल्ला नहीं झाड़ सकती

 26 Dec 2020 10:07 PM

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने एक मामले में अपने अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा है कि जालसाजी और धोखाधड़ी के अपराध को आपसी विवाद करार देकर पुलिस पल्ला नहीं झाड़ सकती है। पुलिस को असंज्ञेय अपराध के तहत धारा 155 के तहत कार्रवाई करते समय मप्र पुलिस रेग्यूलेशन एक्ट के प्रावधानों को पालन करना आवश्यक है। कोर्ट ने आदेश की प्रति प्रदेश के गृह तथा विधि सचिव को भेजकर इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के आदेश जारी किए हैं। 

यह मामला याचिकाकर्ता राजेन्द्र सिंह पवार सहित उनके तीन भाईयों की ओर से दायर किया गया था। जिसमें कहा गया था कि उनकी जमीन को अपना बताकर भोपाल निवासी श्रीधर इंगले ने उसका सौदा कर एडवांस के तौर पर पैसा ले लिया। इस संबंध में उन्होंने लार्डगंज थाने में लिखित शिकायत की थी। शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं करते हुए पुलिस ने धारा 155 के तहत उसे असंज्ञेय अपराध माना। आरोप है कि श्रीधर इंगले इससे पहले इस तरह के आपराधिक कृत्य कर चुके हैं और उनके खिलाफ प्रकरण भी दर्ज हैं। याचिका में दोषी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने की मांग की गई थी। 
जनरल डायरी में दर्ज करना आवश्यक
कोर्ट ने आदेश में कहा है कि मप्र पुलिस रेग्युलेशन की धारा 44 के तहत शिकायत को जनरल डायरी में दर्ज करना आवश्यक है। इसके अलावा डायरी में दर्ज शिकायत का नम्बर भी आवेदक को दिया जाना चाहिए। केस की जांच कर विवेचना अधिकारी को संज्ञेय और असंज्ञेय अपराध के कारणों का लिखित रूप से उल्लेख करना और इस संबंध में आवेदक को अवगत कराना आवश्यक है। 

जांच में लगाती है पुलिस अधिक समय
कोर्ट ने आदेश में कहा है कि यह देखा जा रहा है कि धोखाधड़ी तथा जालसाजी के प्रकरण में जांच में पुलिस अधिक समय लेती है। आर्थिक अपराध के प्रकरण को सिविल नेचर का बताना गलत है। इस संबंध में गृह तथा विधि सचिव पुलिस अधीक्षकों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करें। सिंगल बेंच ने लार्डगंज पुलिस को निर्देशित किया है कि वह याचिकाकर्ता की शिकायत पर 15 दिनों में कार्रवाई करे।