सात साल से अधिक सजा वाले कैदियों को मिले पैरोल

 18 May 2021 09:19 PM

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने कोरोना महामारी तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार हाईकोर्ट द्वारा अंडर ट्रायल व सजायाफ्ता कैदियों को जमानत दिये जाने संबंधी संज्ञान याचिका पर जेल में निरुद्ध बंदियों के संबंध में कहा है कि सात साल से अधिक सजा वाले बंदियों को पैरोल दी जाये। इस संबंध में हाईपावर कमेटी को निर्णय लेने आदेश जारी किये है। चीफ जस्टिस मोह. रफीक व जस्टिस अतुल श्रीधरन की युगलपीठ ने जुवेनाइल अपराधियों की जमानत तथा गिरफतारी के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी आदेश के परिपालन करने सख्त आदेश जारी किये है। संज्ञान याचिक की सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया था कि कोरोना की दूसरी लहर से सवार्धिक प्रभावित प्रदेशों में मध्यप्रदेश भी शामिल है। प्रदेश की जेलों में क्षमता से दोगुने कैदी निरूध्द है। प्रदेश की 131 जेल में 45,582 कैदी निरूध्द है जबकि कुल सक्षता 28,675 कैदियों की है। जेल में निरूध्द 30,982 कैदी अंडर ट्रायल है तथा 14,600 कैदी सजायाफ्ता है,जिसमें से 537 महिला कैदी है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी जेल में निरूध्द सजायाफ्ता तथा अंडर ट्रायल कैदियों को स्थाई व अस्थाई जमानत दिये जाने के संबंध में राज्य सरकारों को दिशा-निर्देश दिये है। प्रदेश सरकार द्वारा प्रिजनर्स एक्ट में संशोधन किये जाने की जानकारी प्रस्तुत की गयी है। संशोधन के अनुसार कोरोना महामारी के मददेनजर कैदियों को 60 दिनों की पैरोल पर रिहा किया जा रहा है। पैरोल की अवधि 60 दिनों की बढोत्तरी किये जाने का प्रावधान है। पैरोल की अवधि 240 दिनों तक बढाई जा सकती है। युगलपीठ ने पूर्व में पारित ओदश में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निदेर्शा तथा पेश किये गये सुझाव पर सात साल से कम की सजा से दण्डित 60 साल से अधिक उम्र के सजायाफ्ता पुरूष तथा 45 साल की सजायाफ्ता महिला कैदियों,गर्भवती सजायाफ्ता महिला कैदियों व जेल में बच्चों के साथ रहने वाले सजायाफ्ता कैदियों तथा गंभीर बीमारियों से ग्रस्त सजायाफ्ता कैदियों को 90 दी की पैरोल दी जाये। इसके अलावा सात साल की सजा से कम में निरुद्ध अंडर ट्रायल कैदी तथा एनएलएसए द्वारा दिसम्बर द्वारा जारी एसओपी के अंतर्गत आने वाले अंडर ट्रायल कैदियों के लिए 90 दिनों की पैरोल प्रदान करने संबंध में हाई पावर कमेटी को स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी की चेयरमेन के साथ बैठक करने के निर्देश दिये थे। युगलपीठ ने जेल में निरूध्द कैदियों तथा जुवेनाइन व चाईल्ड होम में रहने वाला का आरटी-पीसीआर टेस्ट करवाने,कोराना उपचार तथा वैक्सीनेशन के संबंध में दिशा-निर्देश दिये थे।