देवी का श्रृंगार कर दोनों पोतियों को लेकर मंदिरों में जाती हैं रेखा

 22 Apr 2021 12:14 AM

जबलपुर । लॉक डाउन से गरीब वर्ग के बुरे हाल हैं। ऐसे में उन्हें दो जून की रोटी जुटाना भारी पड़ने लगा है। ऐसी ही एक बुजुर्ग महिला रेखा बाई हैं जो अपनी 2 पोतियों नर्मदा व रेवा को देवियों का श्रृंगार कर मंदिर ले जाती हैं और वहां श्रद्धालुओं से मिलने वाली भीख व प्रसाद से दोनों वक्त की रोटियों का इंतजाम करती हैं। रेखा ने बताया कि लॉक डाउन में भूखे मरने की नौबत आ गई है। पिछली साल तो सरकार और संस्थाओं ने भोजन बांटा था मगर इस बार कुछ नहीं मिला। भूखे भी कितने दिन घर में रहें इसलिए हमने अपनी दो पोतियों को माता का श्रृंगार कर मंदिर ले जाते हैं और वहीं पर बैठते हैं,आने-जाने वाले श्रद्धालु बच्चियों को माता के श्रृंगार मेंदेखकर 10-5 रुपए देते हैं और प्रसादभी मिल जाता है। रेखा ने बताया कि ये दोनों बच्चियां मेरी बहू की बेटियां हैं,बेटे-बहू मर चुके हैं और इनका पालन पोषण मेरे जिम्मे है। अब बुढ़ापे में कुछ काम नहीं कर पाती इसलिए अब भिक्षावृत्ति को ही जीवन का सहारा बना लिया है। मंदिरों में जाकर मिले पैसे ही हमारे जीने का सहारा बन गए हैं।

उपदेश देना सरल, पेट भरना कठिन

जब रेखा बाई से कहा गया कि इन बच्चियों को आप भीख मांगने पर मजबूर कर रही हैं इन्हें पढ़ाती क्यों नहीं तो उसका जवाब था कि उपदेश देना बहुत सरल है साहब,मेरा कोई सहारा नहीं है कोई कमाने वाला नहीं है,मेरे हाथ-पांव साथ नहीं देते ऐसे में बच्चियों को भूखा नहीं मार सकती और मैं गली-चौराहे पर भीख नहीं मांगती। मंदिर के द्वार पर बैठती हूं किसी से कुछ नहीं मांगती जो लोग अपनी मर्जी से देते हैं वहीं लेती हूं।