धार्मिक स्वतंत्रता कानून संबंधित याचिकाओं में संशोधन की अनुमति

 09 Apr 2021 12:08 AM

जबलपुर । प्रदेश सरकार के धर्म स्वतंत्रता कानून को अवैधानिक बताते हुए हाईकोर्ट में तीन अलग-अलग याचिका दायर की गयी हैं। सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली बेंच को बताया गया कि राज्यपाल की अनुमति के बाद मप्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम पारित हो गया है। याचिकाओं ने सरकार द्वारा पारित अध्यादेश को चुनौती दी गयी थी। अधिनियम को चुनौती देने के लिए याचिका में संशोधन की अनुमति प्रदान करने का आग्रह किया गया। जिसे स्वीकार करते हुए युगलपीठ ने याचिकाओं पर अगली सुनवाई 23 अप्रैल को निर्धारित किया है। भोपाल निवासी आजम खान सहित दो अन्य याचिकाओं में कहा गया था कि प्रदेश सरकार द्वारा लागू किया गया धर्म स्वतंत्रता कानून अवैधानिक है। यह कानून संविधान की अनुच्छेद 14,19,21 और 25 के सिद्धांतों तथा व्यक्ति के धर्म परिवर्तन व धर्मनिरपेक्षता के अधिकार का उल्लंघन कर रहा है। याचिका में कहा गया था कि इस कानून में धारा 3,4,5,6,7,10,12 व 13 के प्रावधान संविधान में मिले मौलिक अधिकारों के विपरीत हैं।

प्रदेश में 2 मामले दर्ज हुए हैं

याचिका में कहा गया था कि बालिग व्यक्तियों को संविधान में स्वेच्छा से शादी का अधिकार प्राप्त है। नए कानून में डराकर, धमकाकर, छुपाकर शादी करने पर तीन से दस साल की सजा का प्रावधान है और अन्य व्यक्ति भी शिकायत कर सकता है। प्रदेश में दो प्रकरणों ऐसे मामले दर्ज हुए हैं, जिनका विवाह चार साल पहले हुआ था। विवाह के बाद विवाद होता है तो इस कानून के तहत कार्यवाही हो सकती है।

जारी किया गया नोटिस

पूर्व में याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव तथा विधि विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि प्रदेश सरकार द्वारा जारी अध्यादेश के खिलाफ उक्त याचिकाएं दायर की गयीं थीं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हिमांशु मिश्रा, शगुफ्ता सन्नो खान ने पैरवी की।