30 % तक अमीर होंगे 52 गांवों के रहवासी, गाइडलाइन में संशोधन

 08 Apr 2021 12:04 AM

जबलपुर । नगर निगम में विगत 7 साल पहले शामिल हुए 52 गांव जो कि 9 नए वार्ड के रूप में शामिल हुए थे बहुत जल्द 30 फीसदी अमीर हो जाएंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां की जमीनें जिला मूल्यांकन समिति ने 30 फीसदी कलेक्टर गाइड लाइन के अनुरूप मंहगी की हैं। इसका सीधा फायदा स्थानीय रहवासियो ंको होगा। हालाकि इसका नुकसान भी होगा और जमीनों की खरीद-फरोख्त करने पर उन्हें 30 फीसदी रजिस्ट्री शुल्क भी चुकाना होगा। जिला मूल्यांकन समिति ने इस प्रस्ताव को न सिर्फ पास कर दिया है बल्कि प्रदेश शासन के अनुमोदन के लिए भी भेज दिया है। स्वीकृति मिलते ही कलेक्टर गाइड लाइन में उपरोक्त 52 गांवों की जमीनों के दाम 30 फीसदी तक बढ़ जाएंगे। 1 मई से इस बढ़ोत्तरी को लागू किया जा सकता है। इसे देखने वाले दो नजरिये से भी देख रहे हैं। एक तो जमीन खरीदना मंहगा होगा और बेचने वाले को रजिस्ट्री शुल्क ज्यादा देना होगा। वहीं जिनकी जमीनें हैं उनकी कीमतें बढ़ जाएंगी और बेचने वाले को अधिक राशि मिलने लगेगी।

गाइड लाइन से अधिक मूल्य के दस्तावेज पंजीबद्ध हो रहे थे

संपदा विभाग ने उन गांवों पर ज्यादा फोकस करते हुए कलेक्टर गाइड लाइन बढ़ाई है जिनमें प्रचलित कलेक्टर गाइड लाइन से अधिक मूल्य पर दस्तावेज पंजीबद्ध हो रहे थे। इस वृद्धि में सालीवाड़ा, सिलुआ,कोसमघाट, नीमखेड़ा, पिपरिया कला,उमरिया और तिघरा गांव प्रभावित हो रहे हैं। यहां कलेक्टर गाइड लाइन से अधिक मूल्य यानि 200 से 600 प्रतिशत तक ज्यादा रेट पर रजिस्ट्री हो रहीं थीं।

एनएच व एसएच से लगे गांवों को किया शामिल

संपदा विभाग के अनुसार नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे से लगे हुए गांवों में 30 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी की गई है। कुंडम,बरगी,झिन्ना,भेड़ाघाट,सिहोरा रोड, अमझर में ऐसे कई गांव जो एनएच व एसएच से जुड़े हैं।शहर के उन गांवों पर भी संपदा विभाग की नजर रही जिन्हें टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने विकसित गांवों की श्रेणी में रखा था।जोतपुर,घुंसौर, सिवनी टोला,घाना जैसे गांव को विशिष्ट ग्राम की श्रेणी में रखते हुए कलेक्टर गाइड लाइन में इजाफा किया गया है। यहां की जमीन जिसमें खेती हो रही थी। अब यहां की जमीनों की रजिस्ट्री कराने में खरीददारों को ज्यादा कीमत देनी होगी। गाइड लाइन के अनुसार शुरूआती के 500 वर्गमीटर की तक की जमीन को भूखंड की श्रेणी में रखा गया है। इसके बाद की भूमि को कृषि मद में रखा गया है।

फ्लैट रेट की कटौती की भरपाई तो नहीं

गौरतलब है कि वर्ष 2019-20 में प्रदेश सरकार ने 20 प्रतिशत की फ्लैट कटौती कलेक्टर गाइड लाइन में की थी उसकी भरपाई 2020-2021 में कलेक्टर गाइड लाइन में साफ देखने मिल रही है। 2019-20 में सरकार की कटौती करने की मंशा यह रही कि प्रॉपर्टी में उछाल आए और खरीददारी बढ़े और सरकार को भी ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले। लोगों का यह भी कहना है कि वर्तमान में जिस तरह से रेट बढ़ाए जा रहे हैं इससे एक बार फिर मंदी के हालात बन सकते हैं।