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जब सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि जनता के रुपयों से मंदिर बनाया जाए तो विशाल धनराशि 2-4 लोगों के हवाले कैसे कर दी- शंकराचार्य

 15 Jun 2021 09:45 PM

जबलपुर। जब सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि जनता के रुपयों से मंदिर बनाया जाए तो करोड़ों रुपए की विशाल धनराशि को 2-4 लोगों के हवाले कैसे कर दिया गया? मंदिर के लिए कितनी जमीन लगेगी,चंदा उगाही कितनी हुई, जमीन खरीदी की दर क्या होगी, इन सब को श्वेत पत्र के माध्यम से जनता के सामने रखना चाहिए। यह कहना है ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज का। वे मंगलवार को अपनी तपस्थली परमहंसी गंगा आश्रम,श्रीधाम जिला नरसिंहपुर में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। शंकराचार्य ने कहा कि आज भारत निर्मित वातावरण अभतपूर्व है। अत्यंत प्राचीन सनातनी धार्मिक क्षेत्र में जो मिलावट की जा रही है वह अत्यंत चिंताजनक है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के धार्मिक अधिकार क्षेत्र में अयोध्या होने के नाते हमारा यह कर्तव्य है कि  हम आपके माध्यम से अपनी बात देश के सामने रखें। शंकराचार्य महाराज ने कहा कि 1983 में श्रीरामजन्मभूमि के लिए हमने सक्रिय प्रयास चित्रकूट में शंखनाद रैली के माध्यम से प्रारंभ करते हुए देश के विभिन्न संप्रदायों के समस्त हिन्दू धर्माचार्यों का संग्रह कर राजन्म भूमि पुनरुद्धार समिति का पंजीयन करवाया। विभिन्न पक्षकारों के मध्य दशरथ कौशल्या रथयात्रा के माध्यम से संपूर्ण देश की लाखों जनता का हस्ताक्षररूपी जनादेश कि अयोध्या स्थित रामजन्म भूमि हिंदुओ की ही है,प्राप्त किया। इसके लिए हमने मुसलमानों को भी राजी किया। जिसकी कल्पना थी आज वही परिदृश्य उपस्थित है,जबकि अयोध्या स्थित रामजन्म भूमि मंदिर निर्माण ट्रस्ट में केवल भाजपा, संघ और विहिप के लोग ही सम्मिलित हैं और राममंदिर की जगह  भाजपा और संघ का मुख्यालय बनाया जा रहा है। इसके लिए पूरे देश से चंदा लिया जा रहा है। जो न्यास या लोग तथाकथित मंदिर के लिए मोटी रकम दे रहे हैं उनको शासन से उपकृत करवाया जा रहा है और धर्म निरपेक्ष संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हमारी संस्था श्री राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति ने कोर्ट में सिद्ध किया था कि  अयोध्या में ही रामजन्म भूमि है।
 

पूर्व पीएम के समय के न्यास को क्यों हटाया :
 

शंकराचार्य ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंहराव के कार्यकाल में धर्माचार्यों का जन्म भूमि पर मंदिर बनाने के लिए रामालय न्यास का गठन कर दिया गया था तो अकारण ही उसे हटाकर नया तीर्थ नाम से  ट्रस्ट क्यों बनाया गया। पुराने न्यास में क्या गड़बड़ी थी? नए न्यास में क्या गुणवत्ता है। शिलान्यास शुभ मुहूर्त पर भी ध्यान नहीं दिया गया, अत्यंत अशुभ मुहूर्त में किया गया जिसका हमने विरोध भी किया जिसका परिणाम है कि न्यासियों की बुद्धि भ्रष्ट हो रही है। इसका उदाहरण भूमि क्रय  के रूप में प्रत्यक्ष देखाजा सकता है।