क्या होता है ‘कोविडसोमनिया’, कैसे यह आपकी नींद को कर रहा प्रभावित, जानें इस परेशानी से कैसे निपटें

 31 May 2021 04:29 PM

नई दिल्ली। कोरोना वायरस को फैले हुए एक साल से ज्यादा समय हो गया है। इस दौरान महामारी के बारे में लोग लगातार चर्चा कर रहे हैं। कोरोना की वजह से सेहत और लॉकडाउन की वजह से रोजगार को लेकर लोगों का चिंता करना लाजिमी है। लोगों को बेचैनी और भविष्य के बारे में निराशा का एहसास होने लगा है। ये निराशा नियमित जिंदगी में रच बस गई है, जिससे रात में लोगों का सोना और काम करना मुश्किल हो गया है। अमेरिकन एकेडेमी ऑफ स्लीप मेडिसिन के हालिया अध्ययन में 70 फीसदी प्रतिभागियों ने ‘कोविडसोमनिया’ का शिकार होने की बात कही थी। 56 फीसदी ने माना था कि उनकी आधी रात करवटें बदलने में गुजर जाती है। 51 फीसदी ने गहरी नींद के लिए दवाओं और सप्लीमेंट का सहारा लेने का खुलासा किया था। 


क्या है कोरोना सोमनिया
खौफ का असर हमारे दिमाग पर अभी भी बरकरार है। कोरोना न सिर्फ हमारी जिंदगी में भूचाल लाया है, बल्कि दिमागी सेहत और लोगों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित किया है। डर चाहे वायरस के संक्रमण का हो या उससे जुड़े लक्षणों से निपटने का, चिंता और तनाव की कोई सीमा नहीं है। महामारी से हमारी नींद के चक्र पर असर पड़ा है। ये स्थिति कोरोना सोमनिया कहलाती है।


कोरोना सोमनिया का नींद पर प्रभाव 
कोरोना सोमनिया शब्द अनिद्रा के मुद्दों और कोरोना वायरस के कारण नींद की समस्याओं को बताता है। महामारी ने हमारी जिंदगी में बहुत ज्यादा तनाव और चिंता उजागर की है। जर्नल ऑफ क्लीनिकल स्लीप मेडिसीन में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक करीब 40 फीसदी लोगों ने महामारी के नतीजे में सोने की समस्या को रिपोर्ट किया।
वरिष्ठ नींद विशेषज्ञ लुइस एफ ब्यूनेवर के मुताबिक अगर आप दर्द या तकलीफ में हैं या फिर जीवन में मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं तो आपके शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल का स्त्राव सामान्य दिनों से अधिक होगा।
कॉर्टिसोल मस्तिष्क में मौजूद पीनियल ग्रंथि में स्लीप हार्मोन मेलाटोनिन का उत्पादन बाधित करता है, मेलाटोनिन आंखों में मीठी नींद भरने के अलावा रक्तचाप और ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित रखने के लिए जरूरी है।


कोरोना सोमनिया की वजह क्या है?
लोगों में 'कोरोना सोमनिया' होने के कई कारण हैं। लेकिन ज्यादातर कारण कोविड-19 संक्रमण से निपटने में महसूस होने वाली असुरक्षा और डर से जुड़े हैं। परिजनों और परिवार को सुरक्षित करने की बहुत ज्यादा चिंता से दबाव पड़ता है। उसके अलावा, सोशल डिस्टेंसिंग की स्थिति, आइसोलेशन और खौफ सभी मिलकर तनाव में योगदान करते हैं जो नींद से जुड़ी समस्या होती है।


महामारी से जीवनशैली में तब्दीली
कोरोना महामारी ने हमारे जीने के तरीके में गहरा बदलाव लाया है। उसने हमारे रोजाना के शेड्यूल, खानपान की आदतें, काम के वातावरण में बाधा पैदा कर दी है और हमारी दिमागी स्थिरता पर भारी पड़ा है। सोशल डिस्टेंसिंग और क्वारंटीन आज की दुनिया का मानक बन गए हैं। हाल के दिनों में खुद को कम हुई सावधान रखने की क्षमता ने अनिद्रा और नींद की कमी में योगदान दिया है। वैज्ञानिक रिपोर्ट बताती हैं कि तनाव खास हार्मोन जैसे एड्रेनालाइन और कोर्टिसोल के उत्पादन की वजह बन सकते हैं जो ये नींद और आराम को ज्यादा चुनौतीपूर्ण बना सकते हैं। 

 

आइए कुछ आसान व्यायाम और ध्यान मुद्राओं पर नजर डालते हैं, जो स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ का स्तर घटाकर आंखों में मीठी नींद भरने में कारगर हैं।

योग-व्यायाम से मिलेगा आराम
जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के नींद विशेषज्ञों के मुताबिक योग, ध्यान मुद्राएं, ताइची, नृत्य जैसी व्यायाम कलाएं श्वास एवं हृगयगति को नियंत्रित कर तन-मन को तनावमुक्त रखने की शरीर की प्राकृतिक क्रिया को बहाल करती हैं।


इन श्वास क्रियाओं का अभ्यास करें
घर के किसी शांत कोने में फर्श/बिस्तर पर आंखें मूंदकर आरामदायक मुद्रा में बैठें या फिर लेट जाएं।
अब पांच मिनट धीरे-धीरे सांस लें, सारा ध्यान सांसों पर केंद्रित करें, ताकि दिमाग इधर-उधर न भटके।
ध्यान रखें कि सांस अंदर लेते समय पेट बाहर फूले और सांस बाहर छोड़ते समय पेट अंदर की ओर जाए।


मांसपेशियों में तनाव घटाने वाली क्रियाएं
दस बार-बार गर्दन ऊपर-नीचे और दाएं-बाएं घुमाएं, मुट्ठी बांधें और खोलें, मुट्ठी बांधते हुए कलाइयों को गोल-गोल घुमाएं, उंगलियों को मिलाकर दोनों कंधे पर रखें और हाथ गोल-गोल घुमाएं।
इसके बाद पैरों को घुटने से मोड़ते हुए वज्रासन मुद्रा में बैठें, श्वास भरते हुए दोनों हाथ ऊपर ले जाएं और श्वास छोड़ते हुए आगे झुक जाएं, हथेलियों को फर्श पर टिकाते हुए आगे झुक जाएं, दो मिनट इसी मुद्रा में रहें।


सकारात्मक विचारों से सुकून पाएं
सामान्य श्वास क्रिया के बाद एक गहरी सांस भरते हुए सारी मानसिक चिंताओं को एक जगह केंद्रित कर दोनों नासिकाओं से धीमे-धीमे श्वास छोड़ते हुए मन से बाहर निकाल दें।
अब मन में कुछ सकारात्मक विचार लाते हुए मस्तिष्क को पहुंचे सुकून की अनुभूति करें, इसके बाद शरीर के उन अंगों से जुड़े अभ्यास करें, जहां मांसपेशियों में तनाव महसूस हो रहा।


तनावग्रस्त से तनावमुक्त बनने का सफर
20 से 25 मिनट श्वास क्रियाएं और मांसपेशियों में तनाव घटाने वाले व्यायाम करें।
02 हफ्ते में ही तनावग्रस्त से तनावमुक्त बनने का सफर तय करने में मदद मिलेगी।


काम की बात
सोने और उठने का समय निर्धारित करें, दिन में गहरी नींद लेने से बचें।
सोने के समय से एक से डेढ़ घंटे पहले स्क्रीन का इस्तेमाल बंद कर दें।
कमरे में पूरी तरह से अंधेरा रखें, तापमान 16 से 19 डिग्री सेल्सियस के बीच रखें।
सोने से पहले गुनगुने पानी से नहाना, गुनगुने दूध का सेवन करना भी फायदेमंद रहेगा।
रात में एक्शन फिल्में, क्राइम शो न देखें, ‘कॉर्टिसोल’ का स्तर बढ़ने से ‘मेलाटोनिन’ का उत्पादन बाधित होता है।


किताबें पढ़ना फायदेमंद
स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ के स्त्राव में पसंदीदा किताब के पन्ने पलटने पर 68% कमी आती है।
इसमें 61% गिरावट संगीत सुनने, 54% गुनगुना दूध पीने, 42% चहकदमी करने पर दर्ज की गई।
(स्रोत : ससेक्स यूनिवर्सिटी का साल 2020 का अध्ययन)