कोरोना से रिकवर हो रहे बच्चों में पाया गया मल्टी-सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम, छह महीने के अंदर किया जा सकता है ठीक

 30 May 2021 02:39 PM

नई दिल्ली। कोरोना से रिकवर करने वाले बच्चों में अब मल्टी-सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (MSI-C) एक नई चुनौती के रूप में सामने आ रहा है। इस बीमारी की चपेट में 6 महीने से लेकर 15 साल तक के बच्चे आ रहे हैं। हालांकि, 5 से 15 साल के बच्चों में इसके अधिक मामले देखने को मिले हैं। लेकिन इस बीच लंदन से एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। दरअसल एक अध्ययन से पता चलता है कि मल्टी इंफ्लेमेटरी सिन्ड्रोम के गंभीर मामले भी आमतौर पर छह महीने के अंदर ठीक किए जा सकते हैं।

 

मल्टी इंफ्लेमेटरी सिन्ड्रोम
मल्टी इंफ्लेमेटरी सिन्ड्रोम में शरीर में जहरीले तत्व उत्पन्न होने लगते हैं। ये पूरे शरीर में फैल जाते हैं इसका असर शरीर के अंगों पर पड़ता है। इससे शरीर के कई अंग काम करना बंद कर देते हैं, जिसकी वजह से बच्चों की मौत भी हो जाती है। यह बीमारी कोरोना वायरस से जूझ रहे बच्चों या फिर इससे से ठीक हुए बच्चों को हो सकती है।

 

मल्टी-ऑर्गन इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम के लक्षण

  • MIS-C के प्रमुख लक्षण हैं
  • तीन से पांच दिनों तक बुखार का रहना।
  • साथ ही पेट में तेज दर्द, ब्‍लड प्रेशर का लो होना और लूज मोशन आदि होना।
  • इसके अलावा लाल आंखे, लाल चकते, हाथ पैरों में सूजन, कमजोरी, उल्टी, डायरिया, ब्लड प्रेशर बढ़ना आदि भी इसके लक्षण हैं।

MIS-C के मामले पंजाब, महाराष्ट्र और राजधानी दिल्ली से सामने आए हैं। साथ ही चिकित्‍सा विशेषज्ञों की ओर से यह हिदायत भी दी गई है कि पेरेंट्स खासतौर पर इस समय अपने बच्‍चों की स्थिति पर नजर रखें। अगर उन्‍हें तीन दिन से अधिक समय तक बुखार रहता है और इसके साथ शरीर में दर्द हो तो इसे लेकर सावधान हो जाएं और समझ लें कि मामला गंभीर है।

 

6 महीने में हल्के पड़ जाते हैं लक्षण
लांसेट चाइल्ड एंड एडोलसेंट हेल्थ जर्नल में पब्लिस हुए एक अध्ययन के मुताबिक मल्टी इंफ्लेमेटरी सिन्ड्रोम के लक्षण छह महीने में मंद पड़ने लगते हैं। यह अध्ययन लंदन के एक अस्पताल में किया गया है। इस अध्ययन के तहत अस्पताल में भर्ती 46 बच्चों पर छह महीने तक कड़ी निगरानी रखी गई। इसके बाद एक रिपोर्ट तैयार की गई जिसमें पाया गया कि मल्टी इंफ्लेमेटरी सिन्ड्रोम के गंभीर लक्षण होने के बावजूद ये बच्चे छह महीने के भीतर स्वस्थ्य होने की दिशा में अग्रसर दिखे।

 

समस्याओं में दिखी निरंतरता की कमी
छह महीने उपरांत अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद देखा गया कि अध्ययन में शामिल अधिकांश बच्चों में पेट की समस्याओं, सूजन, हृदय संबंधी असामान्यताओं और तंत्रिका संबंधी जैसे गंभीर समस्याओं की निरंतरता में काफी कमी थी। हालांकि कुछ बच्चों में इसके कुछ लक्षण मिले लेकिन यह गंभीर नहीं थे। इससे इन्हें अपने रोजमर्रा के कार्यों को करने में कोई दिक्कत नहीं आ रही थी। कुछ बच्चों में लगातार थकान के कारण व्यायाम करने में भी कठिनाई महसूस की गई।

 

जारी रहेगी रिसर्च
अध्ययन से बेहतर परिणाम हासिल करने के बावजूद रिपोर्ट जारी करने वाले लेखकों ने इसे आगे जारी रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि चूंकि यह अध्ययन एक ही अस्पताल और एक छोटी संख्या पर आधारित है इसलिए इसको और अधिक बेहतर ढंग से समझने के लिए इस रिसर्च का विस्तार करना महत्वपूर्ण होगा। बाल चिकित्सा संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. जस्टिन पेनर ने कहा कि यह रिसर्च काफी उम्मीद भरा है और इससे हमें बहुत आशाएं हैं बावजूद इसके हमें अभी और इसपर बारीकी से निगरानी रखने की जरूरत है।