रिसर्च में खुलासा: सस्ते सैनिटाइजर के इस्तेमाल से भी हो सकता है ब्लैक फंगस

 23 May 2021 01:24 PM

नई दिल्ली। देश में कोरोना का कहर लगातार जारी है। उस पर से अब ब्लैक फंगस के बढ़ते मामले चिंताजनक हैं। कोरोना से बचाव के लिए लगभग सभी घरों में सैनिटाइजर का प्रयोग किया जा रहा है। पर अगर आप सस्ता सैनिटाइजर इस्तेमाल कर रहे हैं तो यह आपके लिए खतरनाक हो सकता है। कोरोना संक्रमित व्यक्तियों में बढ़ते ब्लैक फंगस के मामले सस्ते सैनिटाइजर के कारण भी आ रहे हैं। रिसर्च में खुलासा हुआ है कि ब्लैक फंगस के लिए स्टेरॉयड के अलावा धूल के कण और नकली सेनेटाइजर भी जिम्मेदार है। इनमें मेथेनॉल की मात्रा जरूरत से कहीं ज्यादा होती है। जो आंख और नाक की कोशिकाओं को मृत कर फंगस को उगाने में बेहतर वातावरण तैयार कर रही है। 


आईआईटी- बीएचयू में सिरामिक इंजीनियर विभाग के वैज्ञानिक डॉ. प्रीतम सिंह ने मीडिया को बताया कि, जब हम इन स्प्रे सैनिटाइजर को अपने चेहरे के आसपास ले जाकर छिड़काव करते हैं तो थोड़ी मात्रा इनकी हमारे आंखों और नांक में भी चली जाती है। इससे वहां के रेटिना समेत आखों व नांक की कोशिकाएं मृत हो जाती हैं। इन सैनिटाइजर में 5 फीसदी के आसपास मेथेनॉल है जो फंगस के उगने का बेहतर वातावरण तैयार करता है। इससे आंखों के रेटिना खराब होने के साथ ही रोशनी धीरे धीरे कम होती है और व्यक्ति अंधा होता जाता है।


उन्होंने कहा कि दरअसल, यहां प्रोटीलिसिस प्रक्रिया होती है यानि कि प्रोटीन का लिक्विड निकलने लगता है और मृत प्रोटीन आपस में तेजी से जुड़ने लगते हैं। इसके बाद फंगस बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। वहीं हमारी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हुई है तो ब्लैक फंगस अपना प्रभाव दिखने लगते हैं।