WHO ने एक अध्ययन में किया खुलासा, ज्यादा घंटे काम करना हो रहा है जानलेवा

 19 May 2021 02:04 PM

दुनिया में एक तरफ काम जहां का बोझ बढ़ता जा रहा है तो वहीं काम की वजह से होने वाली बीमारियों का खतरा भी बढ़ता नज़र आ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (IOL) के नए अध्ययन में ये बात सामने आई है कि ज्यादा घंटे काम करना लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।

बढ़ता जा रहा है मौत का खतरा
आजकल अधिकतर लोगों का दिन दफ्तर के कामकाज में ही निकल जाता है। ऐसे में उन्हें अपने लिए कोई खास समय नहीं मिल पाता। जिसकी वजह से वो फिजिकल एक्टिविटी और एक्सरसाइज पर भी ध्यान नहीं दे पाते। नौकरी में मनोवैज्ञानिक दबाव होने, खानपान, अच्छी नींद और कसरत के अभाव की वजह से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। विशेषज्ञों की मानें तो हफ्तेभर में 35-40 घंटों के मुकाबले 55 घंटे काम करने वालों में आघात का 35 फीसदी और हृदय रोग का 17 फीसदी ज्यादा खतरा होता है। यह आदत अधिकांश लोगों में काम से संबंधित बीमारियों और समय से पहले मृत्यु का जोखिम बढ़ाती है।

क्या कहते हैं WHO के आंकड़े
2000, 2010 और 2016 में हुए अध्ययनों में यह सामने आया है कि कार्यस्थल पर अन्य जोखिमों की तुलना में लंबे घंटों तक काम करने से ज्यादा बीमारियां पैदा हो रही हैं। 2016 में पाया गया कि एक हफ्ते में 55 घंटों से ज्यादा नौकरी करने की वजह से करीब 7.45 लाख मौतें हुईं। इनमें 3.98 लाख लोगों की स्ट्रोक (आघात) तो 3.47 लाख लोगों की हृदय रोग के कारण मौत हुई। 2000 और 2016 के बीच देखा गया कि लंबे समय तक काम करने के कारण हृदय रोग से 42 फीसदी और स्ट्रोक से 19 फीसदी मौतें बढ़ी हैं।


किसमें दिखा ज्यादा असर
ज्यादा घंटे काम करने की वजह से हो रहीं बीमारियां ज्यादातर पश्चिमी प्रशांत और दक्षिण-पूर्व एशिया के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, और मध्यम उम्र वाले या बुजुर्गों में दर्ज की गई है। इसके साथ ही 72 फीसदी मौतें पुरुषों में देखी गईं। ज्यादातर मौतें 60 से 79 और 45 से 74 के उम्र के लोगों में दर्ज की गई, जिन्होंने प्रति सप्ताह 55 घंटे या उससे ज्यादा समय तक काम किया। 

कोरोना में क्यों बढ़ा इसका खतरा
कोरोना काल में ज्यादातर कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम कल्चर अपना रखा है। ऐसे में कंपनियां अपेक्षा करती हैं कि कर्मचारी घर है तो वह सामान्य की तुलना में अधिक काम करे। इससे काम के घंटों में बढोत्तरी हो रही है। लोग बैठे-बैठे 12 से 14 घंटे तक काम कर रहे हैं। इस कारण इन लोगों में इस समस्या का खतरा बढ़ जाता है।