रोज डे विशेष: अपने पार्टनर को भेजें गुलाबों पर लिखी यह प्यारी शायरियां

 07 Feb 2021 11:52 AM

रोज डे पर हर कोई अपने पार्टनर को रोज देता है। लेकिन अगर इसके साथ एक प्यारी सी शायरी या शेर पढ़ दिया जाए तो सोने पर सुहागा लग जाता है। आज हम आपको कुछ ऐसे ही शेर बता रहे हैं जो इस मौके को एक प्यारे से गुलाब के साथ और भी खास बना देगा।  
सुनो कि अब हम गुलाब देंगे गुलाब लेंगे
मोहब्बतों में कोई ख़सारा नहीं चलेगा
- जावेद अनवर


निकल गुलाब की मुट्ठी से और ख़ुशबू बन
मैं भागता हूँ तिरे पीछे और तू जुगनू बन
- जावेद अनवर


वो ख़ार ख़ार है शाख़-ए-गुलाब की मानिंद
मैं ज़ख़्म ज़ख़्म हूँ फिर भी गले लगाऊँ उसे
- अहमद फ़राज़


भरी बहार में इक शाख़ पर खिला है गुलाब
कि जैसे तू ने हथेली पे गाल रक्खा है
- अहमद फ़राज़


अरक़ नहीं तिरे रू से गुलाब टपके है
अजब ये बात है शोले से आब टपके है
- अज्ञात


कहाँ चराग़ जलाएँ कहाँ गुलाब रखें
छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता
- निदा फ़ाज़ली


एक मैं ने ही उगाए नहीं ख़्वाबों के गुलाब
तू भी इस जुर्म में शामिल है मिरा साथ न छोड़
- मज़हर इमाम


झोंके नसीम-ए-ख़ुल्द के होने लगे निसार
जन्नत को इस गुलाब का था कब से इंतिज़ार
- ख़ालिद मीनाई


दिन में आने लगे हैं ख़्वाब मुझे
उस ने भेजा है इक गुलाब मुझे
- इफ़्तिख़ार राग़िब


महक उठे रंग-ए-सुर्ख़ जैसे
खिले चमन में गुलाब इतने
- मुनीर नियाज़ी


मैं चाहता था कि उस को गुलाब पेश करूँ
वो ख़ुद गुलाब था उस को गुलाब क्या देता
- अफ़ज़ल इलाहाबादी


ख़ामोश बैठी गजल को अल्फाज़ दे आया,
आज एक गुलाब को गुलाब दे आया