अध्ययन में खुलासा: कोविशील्ड टीके से प्लेटलेट में कमी का खतरा मामूली, यहां पढ़ें पूरी जानकारी

 11 Jun 2021 12:43 PM

नई दिल्ली। कोरोना से बचाव के लिए विकसित ऑक्सफोर्ड- एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड वैक्सीन का संबंध खून में प्लेटलेट की कमी होने से हो सकता है, लेकिन यह खतरा बेहद कम है। इसका खुलासा हाल ही में पूरे ब्रिटेन में की गई एक स्टडी में हुआ। यह रिसर्च पेपर जर्नल नेचर मेडिसिन में प्रकाशित हुआ। रिसर्चर ने बताया कि इस बढ़े हुए खतरे को आइडियोपैथिक थ्रोम्बोसाइटोपिनक प्यूप्यूरा (आईटीपी) के नाम से जानते हैं। आकलन है कि यह स्थिति प्रति 10 लाख टीके लगाने पर 11 मामलों में हो सकती है जो फ्लू, खसरा और रुबेला के टीके लगाने पर आने वाले मामलों के बराबर है।

 

  • उन्होंने बताया कि प्लेटलेट की संख्या कम होने से रक्त कोशिकाओं (जो नसों के क्षतिग्रस्त होने पर खून गिरने से रोकती हैं) से कोई लक्षण सामने नहीं आ सकते हैं। या फिर स्राव या कुछ मामलों में खून का थक्का जमने की स्थिति उत्पन्न होने का खतरा बढ़ सकता है।
  • ब्रिटेन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के अनुसंधानकर्ताओं के नेतृत्व में हुए शोध में पाया गया कि आईटीपी होने का खतरा करीब 69 साल के लोगों को है। जो किसी गंभीर बीमारी जैसे दिल की बीमारी, मधुमेह या गुर्दे की बीमारी से ग्रस्त हैं।
  • हालांकि, रिसर्चर वैक्सीनेशन कराने वाले लोगों में खून का थक्का जमने के मामलों की संख्या कम होने की वजह से टीके का सीधा संबंध अन्य तरह के खून के थक्के जमने के प्रकारों- जैसे अति दुर्लभ सेरेब्रेल वेनोस साइनस थ्रोम्बोसिस या सीवीएसटी (दिमाग में खून का थक्का जमने की घटना) - से स्थापित नहीं कर पाए।
  • रिसर्च में स्कॉटलैंड में टीका लगवा चुके 54 लाख लोगों के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया। जिनमें से 25 लाख लोगों को टीके की पहली डोज मिली थी। अनुसंधानकर्ताओं ने राष्ट्रव्यापी टीकाकरण के बाद इन लोगों में आईटीपी, खून के थक्के जमने और रक्त स्राव की घटनाओं का विश्लेषण किया।