किसानों से बातचीत के लिए बनी 4 सदस्यीय कमेटी से भूपिंदर सिंह मान ने अपना नाम लिया वापस

 14 Jan 2021 03:22 PM

नई दिल्ली। नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन का आज 50वां दिन है। किसान नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हैं। किसान नेताओं का कहना है कि जब तक कानून वापस नहीं लिए जाते हैं हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा। वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा 12 जनवरी को नए कानून की समीक्षा के चार सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इस बीच यह खबर है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के एक सदस्य भूपिंदर सिंह मान ने खुद को कमेटी से अलग कर लिया है। उन्होंने कहा है कि वह किसानों के जज्बात देख अलग हुए हैं। 

सुप्रीम कोर्ट की चार सदस्यीय कमेटी से अलग हुए भूपिंदर सिंह मान
सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों की समीक्षा के लिए जो चार सदस्यीय कमेटी बनाई है उससे भूपिंदर सिंह मान ने खुद को अलग कर लिया है। मान का कहना है कि वह किसानों के जज्बात को देखते हुए कमेटी से अलग हुए हैं। उनका कहना है कि वह किसानों के साथ हमेशा खड़े रहेंगे और उनके हितों के खिलाफ कभी नहीं जाएंगे।

राकेश टिकैत ने कहा- इस बार गणतंत्र दिवस ऐतिहासिक होगा
इस बार का गणतंत्र दिवस ऐतिहासिक होगा। 26 जनवरी की परेड में कई लाख ट्रैक्टर शामिल होंगे। पूरा आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जाएगा। हिंसा करने वाले किसी भी शख्स से किसान संगठनों का कोई लेना-देना नहीं है। अगर आंदोलन में कोई भी हिंसा करता है तो वह खुद इसका जिम्मेदार होगा। वह आगे बोले कि, संयुक्त किसान मोर्चा ने 26 जनवरी की परेड के लिए दिल्ली सरकार से  पांच लाख राष्ट्रीय ध्वज की मांग की है।

भूपिंदर सिंह मान की समिति कृषि कानूनों का समर्थन कर चुकी
5 सितंबर 1939 को गुजरांवाला (अब पाकिस्तान में) में पैदा हुए सरदार भूपिंदर सिंह मान किसानों के लिए हमेशा काम करते रहे हैं। इस वजह से राष्ट्रपति ने 1990 में उन्हें राज्यसभा में नामांकित किया था। वे अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति के चेयरमैन भी हैं। मान को कृषि कानूनों पर कुछ आपत्तियां हैं। उनकी समिति ने 14 दिसंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कुछ आपत्तियों के साथ कृषि कानूनों का समर्थन किया था। पत्र में लिखा था, ह्यआज भारत की कृषि व्यवस्था को मुक्त करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जो तीन कानून पारित किए गए हैं, हम उन कानूनों के पक्ष में सरकार का समर्थन करने के लिए आगे आए हैं।