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बसपा विधायक रामबाई के पति की जमानत खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ऐसा लगता है जैसे देश में दो न्याय प्रणाली चल रहीं

 22 Jul 2021 04:13 PM

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के पथरिया (दमोह) से बसपा विधायक रामबाई को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने रामबाई के पति की जमानत रद्द कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में ताकतवर लोगों के लिए अलग कानून नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने वाले हाईकोर्ट के फैसले की निंदा की। SC ने कहा कि निचली अदालत के जजों को सुरक्षा देने की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की भूमिका पर टिप्पणी की और कहा कि ऐसा लगता है जैसे देश में दो अलग-अलग न्याय प्रणाली चल रही हैं। एक हाईकोर्ट की और दूसरी निचली अदालत की। निचली अदालत के जज भय में काम करते है, असुरक्षित महसूस करते हैं। इसे ठीक करने की जरूरत है।

दरअसल, बसपा विधायक रामबाई का पति गोविंद सिंह हत्या का आरोपी है, उस पर कांग्रेस नेता देवेंद्र चौरसिया की हत्या का आरोप है। निचली अदालत ने गोविंद सिंह को जमानत नहीं दी थी, लेकिन उसे हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उसकी जमानत रद्द कर दी है। इसके बाद गोविंद को जेल जाना पड़ेगा।

इस मामले में खास बात ये है कि निचली अदालत में सुनवाई कर रहे एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उनको अपनी सुरक्षा को लेकर डर है। निचली अदालत ने गोविंद सिंह की जमानत रद्द कर दी थी। आज सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश से कहा कि इस बात की जांच करें कि निचली अदालत के जज को किससे डर था और क्यों?

सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताई कि हाईकोर्ट ने गोविंद सिंह को कैसे जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि नियम और कानून के मुताबिक उन्हें किसी कीमत पर जमानत नहीं दी जानी थी। जमानत देने का नतीजा ये हुआ कि इस केस की तफ्तीश पर असर पड़ा। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने भी आरोपी की खूब मदद की, लेकिन इस देश में ताकतवर लोगों के लिए अलग कानून नहीं होगा।

यह है देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड
बसपा विधायक रामबाई के पति गोविंद सिंह पर 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता देवेंद्र चौरसिया की हत्या करने का आरोप है। मामले में पुलिस ने गोविंद सिंह समेत उनके परिवार के सदस्यों को आरोपी बनाया था। सबसे पहले निचली अदालत ने गोविंद सिंह के खिलाफ वारंट जारी किया, लेकिन आदेश देने वाले जज ने परेशान करने के आरोप लगाए थे। वारंट जारी करने वाले जज ने डिस्ट्रिक्ट जज को चिट्ठी लिखकर सूचित किया था कि पुलिस उन्हें धमकी दे रही है। आरोपी गोविंद कमलनाथ सरकार के दौरान विधानसभा में भी नजर आया था, लेकिन पुलिस ने उस समय उसे क्लीन चिट दे दी थी।