अगले 20 साल तक होता रहेगा कोरोना का संक्रमण, वैक्सीन निमार्ता कंपनी सीरम का दावा

 23 Oct 2020 08:42 PM

पुणे। दुनिया की अग्रणी वैक्सीन निर्माता भारतीय कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट का दावा है कि कोरोना महामारी जल्दी खत्म नहीं होने वाली, बल्कि इसका संक्रमण अगले दो दशक तक होता रहेगा। कंपनी के सीईओ अदार पूनावाला ने एक इंटरव्यूर में कहा है कि दुनिया में कोरोना का संक्रमण अगले 20 साल तक होता रहेगा और तबतक कोरोना वैक्सीन की जरूरत भी रहेगी। कोरोना वैक्सीन की जरूरत पर अदार पूनावाला ने कहा कि इतिहास में कभी ऐसा नहीं देखा गया है कि किसी वैक्सीन की जरूरत एक ही बार में खत्म हो गई हो। उन्होंने फ्लू, निमोनिया, पोलियो, चेचक आदि बीमारियों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन सभी बीमारियों की वैक्सीन कई सालों से चल रही है, इनमें से कोई वैक्सीन अभी बंद तो नहीं हुई है। कोविड की वैक्सीन पर भविष्य में ऐसा ही होने वाला है। 
वैक्सीन बीमारी से बचाती है:
पूनावाला ने कहा कि यदि 100 फीसदी आबादी का भी टीकाकरण कर दिया जाए तो भी कोरोना वैक्सीन की जरूरत खत्म नहीं होगी।   वैक्सीन की फिर भी इसकी जरूरत बनी रहेगी। उन्होंने तर्क दिया कि वैक्सीन कोई ठोस वैज्ञानिक उपाय नहीं है। यह केवल आपकी इम्यूनिटी बढ़ाता है। आपमें बीमारी से लड़ने की एंटीबॉडी पैदा कर सकता है। यह आपको बीमारी से बचाता है, लेकिन 100 फीसदी नहीं। 
तीसरे चरण के ह्यूमन ट्रायल से गुजर रही है वैक्सीन :
सीरम इंस्टिट्यूट कंपनी आॅक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की शोध पर तैयार वैक्सीन को कोविशील्ड नाम से लॉन्च करने वाली है। यह नॉन-रेप्लिकेटिंग वायरल वेक्टर वैक्सीन है। एस्ट्राजेनेका से करार के तहत भारत में पुणे की कंपनी सीरम इसे तैयार कर रही है। यह वैक्सीन तीसरे चरण के ह्यूमन ट्रायल से गुजर रही है।

भारत बायोटेक वैक्सीन को तीसरे फेज के ट्रायल की मंजूरी
इसबीच देश में वैक्सीन की प्रोग्रेस को लेकर अच्छी खबर है। भारत बायोटेक कंपनी की वैक्सीन को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल आॅफ इंडिया  (डीसीजीआई) से तीसरे फेज के ट्रायल की मंजूरी मिल गई है। बता दें कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के सहयोग से भारत बायोटेक कोवाक्सिन टीका स्वदेशी रूप से विकसित कर रही है। दरअसल, भारत बायोटेक उन दो कैंडिडेट में से एक है जो स्वदेशी हैं। भारत बायोटेक ने पहले और दूसरे फेस के ट्रायल के डाटा के साथ एनिमल चैलेंज डेटा पेश किया। सारा डेटा देखकर हुई चर्चा के बाद मंजूरी दी गई है।

रूसी वैक्सीन 100 भारतीय वालंटियर्स को लगाई जाएगी 
इधर कोरोना के खिलाफ रूसी स्पुतनिक वी वैक्सीन का परीक्षण भारत में 100 स्वयंसेवकों पर किया जाएगा। भारतीय औषधि महा नियंत्रक (डीजीसीआई) ने परीक्षण करने के लिए फार्मास्युटिकल कंपनी डॉ. रेड्डी की प्रयोगशालाओं को अनुमति दी है। हालांकि, परीक्षण की तारीख और समय कंपनी द्वारा निर्धारित किया जाएगा।  टीका लगने के तीसरे चरण में पहुंचने से पहले दो क्लीनीकल ट्रायल किए जाएंगे।