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5 गुना बढ़े किसान आंदोलन

 10 Jun 2021 11:32 PM

नई दिल्ली। देश के 52 फीसदी जिलों में खेतिहर मजदूरों की संख्या किसानों की तुलना में ज्यादा हो गई है। सरकार ने 2017 में किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया लेकिन बीते चार वर्षों में देश में किसानों के आंदोलन पांच गुना बढ़ गए हैं। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की सालाना रिपोर्ट स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरनमेंट में यह आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में मौसमी आपदाओं के चलते 39 लाख लोगों को विस्थापित किया गया और 21 बड़ी मौसमी घटनाओं में 1374 लोगों की जान चली गई। रिपोर्ट के मुताबिक बिहार, केरल व पुडुचेरी के सभी जिलों में किसानों की तुलना में खेतिहर मजदूर अधिक हो गए हैं। बिहार के 38 जिलों में कुल 78 फीसदी खेतिहर मजदूर हो गए हैं और केवल 22 फीसदी (2 करोड़ 55 लाख) किसान हैं। झारखंड में 54 फीसदी (14 जिलों) खेतिहर मजदूर व 46 फीसदी (10 जिले) में (83 लाख) किसान हैं। मप्र में 2.60 करोड़ किसान मध्यप्रदेश में 2 करोड़ 20 लाख किसान हैं, यहां 13 जिलों में किसान व 37 जिलों में खेतिहर मजदूर अधिक हैं। पश्चिम बंगाल में भी 33 फीसदी किसान व 67 फीसदी खेतिहर मजदूर हैं, राज्य के 19 में से केवल 2 जिलों में ही किसानों की संख्या खेतिहर मजदूरों से ज्यादा है। देश में प्रतिदिन 28 किसान या खेतिहर मजदूर आत्महत्या कर रहे हैं, यह संख्या महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश व तेलंगाना में सबसे ज्यादा है।

सर्वाधिक प्रदर्शन ओड़िशा में

2017 में जब सरकार ने किसान की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा था, तब देश के 15 राज्यों में 34 बड़े किसान आंदोलन या प्रदर्शन हुए थे, जबकि 2020-21 तक 22 राज्यों में 165 किसान आंदोलन या प्रदर्शन हुए, इनमें से 96 विरोध प्रदर्शन केवल सरकार की आर्थिक व कृषि नीतियों के खिलाफ हुए हैं। सबसे अधिक 19 प्रदर्शन ओडीशा में हुए।

14 करोड़ हेक्टेयर में से सिर्फ 2 % भूमि पर ऑर्गेनिक खेती

देश की 14 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि में से केवल दो फीसदी पर ही ऑर्गेनिक खेती होती है। देश में आपदाओं के चलते 39 लाख लोगों को विस्थापन करना पड़ा। सबसे अधिक लोग भारतीय तटों पर आए समुद्री तूफान से प्रभावित हुए। 1971 से 2020 तक 50 वर्षों के दौरान नवंबर महीने में 38 तूफान आए जबकि मई के महीने 15 तूफान आए।

कृषि कानूनों का विरोध : पानीपत से हजारों किसानों का दिल्ली कूच

पानीपत। हरियाणा के पानीपत टोल प्लाजा से गुरुवार को भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष सरदार गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व में हजारों किसानों ने दिल्ली कूच किया। किसान नेता चढूनी ने दिल्ली कूच से पहले पानीपत के टोल प्लाजा पर किसानों एवं मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार के तीन कृषि कानून किसान नहीं बल्कि व्यापारी हितैषी हैं। कृषि कानूनों से केवल पूंजीपतियों को फायदा होगा। इन कानूनों के लागू होने पहले किसान बर्बाद होगा और फिर मजदूर, अनाज, दाल आदि इतनी महंगी हो जाएगी कि देश की जनता अनाज के दाने दाने को मोहताज हो जाएगी। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार से किसान संगठनों की 11 बैठकें हो चुकी हैं। इसके बावजूद भी केंद्र सरकार यह नहीं समझा पाई कि तीनों कृषि कानून कैसे किसानों के लिए लाभदायक है। वहीं भाकियू जिलाध्यक्ष सुधीर जाखड ने भाजपा और जजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपाइयों को गांवों में नहीं घुसने दिया जाएगा। इधर, पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार किसान सुबह ही टोल प्लाजा पर जुटने लगे थे। जिसके चलते राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-44 की दिल्ली जाने वाली लेन पर यातायात बाधित रहा।