शादी से 30 दिन पहले नोटिस देना प्राइवेसी का हनन, इसे ऑप्शनल बनाएं : इलाहाबाद हाईकोर्ट

 13 Jan 2021 10:16 PM

प्रयागराज। अलग-अलग धर्मों के कपल की शादी के मामले में बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश के स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी से 30 दिन पहले जरूरी तौर पर नोटिस देने के नियम अनिवार्य नहीं है।  यह कपल की इच्छा पर निर्भर होना चाहिए कि वह नोटिस देना चाहते हैं या नहीं। इसको ऑप्शनल बनाना चाहिए।  ऐसा नोटिस निजता का हनन है। हाईकोर्ट ने यह फैसला उस पिटीशन पर सुनाया, जिसमें एक कपल ने अदालत से कहा था कि शादी से 30 दिन पहले नोटिस देने से उनकी निजता का उल्लंघन हो रहा है। पिटिशनर ने कहा था कि दूसरे धर्म के लड़के से शादी की इच्छा रखने वाली एक बालिग लड़की को हिरासत में रखा गया है। मामले की सुनवाई पर हाईकोर्ट ने कहा- जो लोग शादी करना चाहते हैं, वे मैरिज अफसर से लिखित अपील कर सकते हैं कि 30 दिन पहले नोटिस को पब्लिश किया जाए या नहीं। अगर कपल नोटिस पब्लिश नहीं करना चाहता है तो मैरिज अफसर को ऐसा कोई नोटिस पब्लिश नहीं करना चाहिए। साथ ही इस पर किसी भी तरह की आपत्ति पर ध्यान नहीं देना चाहिए। उसे इस शादी को विधिवत पूरा करवाना चाहिए।

क्या है स्पेशल मैरिज एक्ट 1954:
इस कानून के तहत दो अलग-अलग धर्म के लोग अपने धर्म को बदले बिना रजिस्टर्ड शादी कर सकते हैं। इसके लिए एक फॉर्म भरना होता है और मैरिज रजिस्ट्रार के पास जमा कराना होता है। शादी से 30 दिन पहले रजिस्ट्रार के पास नोटिस देकर जोड़े को बताना होता है कि वे शादी करने वाले हैं। यह नोटिस छापा जाता है। इसके छपने के बाद अगर रजिस्ट्रार के पास किसी तरह की कोई आपत्ति नहीं आती है तो जोड़े शादी के लिए आवेदन करते हैं।